काशी कोतवाल बाबा कालभैरव का भव्य हिम श्रृंगार, सजी दिव्य झांकी, दर्शन को उमड़ा भक्तों का सैलाब

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दो दशकों से निभाई जा रही परंपरा, अमरनाथ धाम की तर्ज पर बाबा बर्फानी की प्रतिकृति बनी आकर्षण का केंद्र

 पंचामृत स्नान के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ बाबा का दिव्य हिम श्रृंगार

 फूलों, बर्फ की सिल्लियों और रंग-बिरंगी सजावट से अलौकिक बना मंदिर परिसर

 

अमरनाथ धाम की तर्ज पर तैयार बर्फानी बाबा की झांकी ने श्रद्धालुओं को किया आकर्षित

 

भजन संध्या में देर रात तक गूंजती रही बाबा कालभैरव की महिमा

वाराणसी। सावन मास के पावन अवसर पर काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव का पारंपरिक एवं भव्य हिम श्रृंगार महोत्सव गुरुवार को श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। बाबा के दिव्य हिम श्रृंगार और मनोहारी झांकी के दर्शन के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। पूरा मंदिर रंग-बिरंगे पुष्पों, मालाओं, हरी पत्तियों और बर्फ की सिल्लियों से सुसज्जित रहा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और अलौकिक दिखाई दिया।

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श्रृंगार महोत्सव के संयोजक पं. पवन कुमार उपाध्याय के आचार्यत्व में दोपहर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा कालभैरव का पंचामृत स्नान कराया गया। इसके बाद सिंदूर अर्पित कर नवीन वस्त्र एवं विशेष मुखौटा धारण कराया गया। सुगंधित पुष्पों, आभूषणों और विभिन्न पूजन सामग्रियों से बाबा का भव्य हिम श्रृंगार किया गया। दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

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महोत्सव के दौरान बाबा कालभैरव की रजत प्रतिमा की आकर्षक झांकी सजाई गई। वहीं मंदिर परिसर में अमरनाथ धाम की तर्ज पर बर्फ की सिल्लियों से बर्फानी बाबा की भव्य प्रतिकृति तैयार की गई, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। श्रद्धालुओं ने निर्धारित दूरी से जलाभिषेक कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

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हिम श्रृंगार के अवसर पर मंदिर परिसर को गुलाब, गेंदा, बेला सहित विभिन्न सुगंधित फूलों से सजाया गया। रंग-बिरंगे हिमखंडों, कृत्रिम हिमखंड सरोवर, हरी पत्तियों और विविध प्रकार के फलों की सजावट ने धार्मिक वातावरण को और अधिक मनमोहक बना दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अनूठे दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए।

kal bhairav

मंदिर के पुजारियों के अनुसार, बाबा कालभैरव का यह विशेष हिम श्रृंगार केवल सावन मास में किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अनुष्ठान से अतिवृष्टि और प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। यह परंपरा पिछले लगभग 20 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही है और प्रत्येक वर्ष हजारों श्रद्धालु इसमें शामिल होकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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श्रृंगार महोत्सव के समापन पर मंदिर परिसर में भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। प्रसिद्ध भजन गायकों ने बाबा कालभैरव की महिमा का गुणगान करते हुए भक्ति गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। देर शाम तक श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे रहे और पूरा मंदिर परिसर "जय कालभैरव" के जयघोष से गुंजायमान रहा।

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काशी कोतवाल बाबा कालभैरव का भव्य हिम श्रृंगार

काशी कोतवाल बाबा कालभैरव का भव्य हिम श्रृंगार

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