वाराणसी के 750 विद्यालयों में पहुंचेगा ‘काशी गीता चेतना अभियान’, नई शिक्षा नीति के तहत मूल्यपरक शिक्षा पर जोर

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वाराणसी। विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवनोपयोगी शिक्षाओं से जोड़ने के उद्देश्य से कर्मयोगी पीठ द्वारा ‘काशी गीता चेतना अभियान’ शुरू किया जा रहा है। नई शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप संचालित इस अभियान के तहत जनपद के लगभग 750 माध्यमिक विद्यालयों तक पहुंचकर छात्रों को भारतीय मूल ग्रंथों, विशेषकर श्रीमद्भगवद्गीता के जीवन-दर्शन और उसके व्यावहारिक संदेशों से परिचित कराया जाएगा।

शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कर्मयोगी पीठ के प्रमुख संयोजक गौरव मिश्रा ने बताया कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और नैतिक शिक्षा भी समान रूप से आवश्यक है। इसी सोच के साथ अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है, ताकि विद्यार्थी भारतीय सांस्कृतिक विरासत और जीवन मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकें।

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उन्होंने बताया कि अभियान के लिए वाराणसी के करीब 750 माध्यमिक विद्यालयों की सूची तैयार की गई है। संस्था के प्रतिनिधि प्रत्येक विद्यालय से संपर्क कर प्रबंधन से सहयोग का अनुरोध करेंगे। विद्यालयों की सहमति और सुविधा के अनुसार वहां विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें विद्यार्थियों को गीता और अन्य भारतीय मूल ग्रंथों के प्रेरक संदेशों से अवगत कराया जाएगा।

गौरव मिश्रा ने जानकारी दी कि अभियान का शुभारंभ 9 अगस्त से लहरतारा स्थित सिल्वर ग्रो स्कूल में होगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से जिले के विभिन्न विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं तक इस पहल का लाभ पहुंच सके। उन्होंने बताया कि कर्मयोगी पीठ इससे पहले भी भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए अभियान चला चुकी है। लगभग एक माह पूर्व पुरुषोत्तम मास के दौरान संस्था के कार्यकर्ताओं ने काशी के उत्तरी क्षेत्र के करीब 150 गांवों का भ्रमण कर ग्रामीणों तक गीता और भारतीय संस्कृति का संदेश पहुंचाया था। इस अभियान का समापन सारनाथ स्थित बुद्धा थीम पार्क सभागार में आयोजित ‘गीता प्रेरणा महोत्सव’ के साथ हुआ था।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मिले सकारात्मक सहयोग और उत्साहजनक परिणामों के बाद अब इस अभियान का विस्तार विद्यालयों तक किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी भारतीय जीवन-दर्शन, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत से अधिक गहराई से जुड़ सके।

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