कोर्स वर्क में देरी से अटकी नौकरी, बीएचयू केंद्रीय कार्यालय पर शोधार्थी का आमरण अनशन शुरू
वाराणसी। बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय परिसर में बुधवार को इतिहास विभाग के एक शोधार्थी ने अपनी शैक्षणिक समस्या के समाधान की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया। शोधार्थी का आरोप है कि पीएचडी का निर्धारित कोर्स वर्क समय पर पूरा नहीं कराए जाने के कारण बिहार में सहायक प्रोफेसर (संविदा) के पद पर उनकी नियुक्ति के बावजूद ज्वाइनिंग नहीं हो पा रही है। अनशन की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन और सुरक्षा कर्मी सतर्क हो गए।
आमरण अनशन पर बैठे शोधार्थी की पहचान इतिहास विभाग के पीएचडी छात्र श्यामल कुमार के रूप में हुई है। उनका कहना है कि उन्होंने पीएचडी के लिए निर्धारित दो वर्ष की रेजिडेंशियल अवधि पूरी कर ली है, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोर्स वर्क नहीं कराया गया। इसके चलते शोध प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है और नियुक्ति से जुड़ी औपचारिकताएं भी अधूरी रह गई हैं।

श्यामल कुमार के अनुसार, हाल ही में उनका चयन बिहार में सहायक प्रोफेसर (संविदा) के पद पर हुआ है। यह अवसर उनके शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन पीएचडी की लंबित प्रक्रिया के कारण वह समय पर पदभार ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उनके करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
शोधार्थी ने आरोप लगाया कि उनके साथ प्रवेश लेने वाले कई अन्य विभागों के शोधार्थी अपनी पढ़ाई पूरी कर विभिन्न संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि इतिहास विभाग में कोर्स वर्क लंबित रहने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है। उन्होंने कहा कि कई बार विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष अपनी समस्या रखने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
अनशन पर बैठे श्यामल कुमार ने कहा कि वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं और वर्तमान समय में नौकरी प्राप्त करना आसान नहीं है। ऐसे में मिली नियुक्ति उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि वह किसी प्रकार का विवाद नहीं चाहते, बल्कि केवल यह चाहते हैं कि विभाग शीघ्र कोर्स वर्क पूरा कराए ताकि वे अपनी पीएचडी की प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए नौकरी ज्वाइन कर सकें।
शोधार्थी ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा। मामले की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन शोधार्थी की मांगों पर क्या फैसला लेता है और लंबित कोर्स वर्क को लेकर विभागीय स्तर पर कब तक कार्रवाई की जाती है।

