जन्माष्टमी को लेकर बाजारों में बढ़ी रौनक, लड्डू गोपाल के झूले से लेकर बाल लीलाओं वाले खिलौनों की धूम
झूले, पालने, पोशाक, मुकुट, बांसुरी और मोरपंख की बढ़ी मांग, इलेक्ट्रॉनिक खिलौने भी बच्चों को लुभा रहे
4 सितंबर को मनाई जाएगी जन्माष्टमी, काशी के बाजारों में सजने लगीं कृष्ण जन्मोत्सव से जुड़ी दुकानें
बाल लीलाओं पर आधारित झांकियों के सामान की खरीदारी शुरू, बच्चों को राधा-कृष्ण के रूप में सजाने की भी तैयारी
वाराणसी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर काशी के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। चार सितंबर, शुक्रवार को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। पर्व में अब कुछ ही दिन शेष रहने के कारण शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक दुकानदारों ने भगवान श्रीकृष्ण, लड्डू गोपाल और जन्माष्टमी से जुड़े सजावटी सामानों से दुकानें सजा दी हैं। झूले, पालने, पोशाक, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, इलेक्ट्रॉनिक खिलौने और कृष्ण की बाल लीलाओं से संबंधित झांकियों के सामान लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।

झूले और पालने बने आकर्षण का केंद्र
जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को झूला झुलाने की परंपरा के चलते बाजारों में तरह-तरह के आकर्षक झूले और पालने उपलब्ध हैं। लकड़ी, पीतल और धातु के झूलों के अलावा मखमली कपड़े, मोतियों, झालरों, फूलों और रंगीन रिबन से सजाए गए झूले भी लोगों को पसंद आ रहे हैं। साधारण से लेकर डिजाइनर झूलों की कई रेंज बाजार में मौजूद है। वाराणसी में लड्डू गोपाल के कुछ झूले पांच हजार रुपये तक में बिक रहे हैं।

मुकुट, मोरपंख और बांसुरी की बढ़ी मांग
लड्डू गोपाल के श्रृंगार के लिए रंग-बिरंगी पोशाक, मुकुट, मोरपंख, बांसुरी, हार, कंगन और अन्य श्रृंगार सामग्री की मांग बढ़ गई है। जरी, गोटा-पत्ती, मोती और स्टोन वर्क से सजी पोशाकें बाजार में उपलब्ध हैं। अलग-अलग डिजाइन और आकार की पोशाकें बच्चों के साथ-साथ लड्डू गोपाल के लिए भी खरीदी जा रही हैं।

इलेक्ट्रॉनिक खिलौने बच्चों को लुभा रहे
पारंपरिक खिलौनों के साथ इस बार इलेक्ट्रॉनिक खिलौने भी बाजार में खास आकर्षण बने हुए हैं। रोशनी करने वाले खिलौने, नाचता हुआ मोर, बांसुरी बजाते कन्हैया और संगीत वाले खिलौने बच्चों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार बच्चे अब मिट्टी और प्लास्टिक के पारंपरिक खिलौनों के साथ इलेक्ट्रॉनिक और चलने-बोलने वाले खिलौनों को भी खूब पसंद कर रहे हैं।

बाल लीलाओं पर आधारित झांकियों की तैयारी
जन्माष्टमी पर घरों, मंदिरों और मोहल्लों में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित झांकियां सजाने की तैयारी शुरू हो गई है। बाजारों में गाय-बछड़े, ग्वाले, गोपियां और कृष्ण की विभिन्न लीलाओं से जुड़े मिट्टी व प्लास्टिक के खिलौने उपलब्ध हैं। दुकानदारों ने श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर उनकी बाल लीलाओं तक को दर्शाने वाले कई आकर्षक खिलौने मंगाए हैं। इनमें कारागार में देवकी-वसुदेव, वासुदेव द्वारा कृष्ण को डोली में लेकर यमुना पार करने, पूतना वध और बकासुर वध जैसे प्रसंगों से जुड़े खिलौने शामिल हैं।

ग्राहकों की पसंद के अनुसार मंगाए सामान
जन्माष्टमी पर हर वर्ष दुकान लगाने वाले दुकानदार सोनू सोनकर ने बताया कि इस बार ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रकार के खिलौने और सजावटी सामान मंगाए गए हैं। दुकान पर भगवान श्रीकृष्ण की पालकी, वस्त्र, बांसुरी, मोरपंख, मुकुट और बाल लीलाओं से संबंधित खिलौने उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि सजावट के सामान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बुलडोजर वाला खिलौना भी रखा गया है, जो बच्चों और ग्राहकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

राधा-कृष्ण के रूप में सजेंगे बच्चे
जन्माष्टमी पर बच्चों को राधा-कृष्ण के रूप में सजाने की परंपरा को देखते हुए उनके परिधानों की भी मांग बढ़ गई है। दुकानों पर छोटे बच्चों के लिए धोती-कुर्ता, पीतांबर, मुकुट, बांसुरी और मोरपंख के साथ राधारानी की पोशाकें उपलब्ध हैं। अभिभावक बच्चों के लिए जन्माष्टमी की पोशाक खरीदने बाजार पहुंच रहे हैं।

ग्रामीण बाजारों में भी तैयारी तेज
शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों में भी जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। गांवों की छोटी-छोटी दुकानों पर मिट्टी के खिलौने, रंगीन झालर, झांकी सजाने का सामान, भगवान कृष्ण की तस्वीरें, पालने और पूजा सामग्री बिक्री के लिए सज गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक झांकियों के लिए मिट्टी से बने गाय-बछड़े, ग्वाले और गोपियों की मांग भी बनी हुई है।

परंपरा के साथ आधुनिकता का संगम
जन्माष्टमी के बाजार में इस बार परंपरा और आधुनिकता का संगम देखने को मिल रहा है। एक ओर मिट्टी के पारंपरिक खिलौने, लकड़ी के पालने और साधारण बांसुरी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इलेक्ट्रॉनिक झालर, रोशनी वाले खिलौने और संगीत बजाने वाले आधुनिक सामान बच्चों की पसंद बने हुए हैं।




