पप्पू यादव, राहुल गांधी और अवधेश प्रसाद पर FIR दर्ज कराने वाले जगदगुरु बालक देवाचार्य ने किया बड़ा ऐलान, दिया अल्टीमेटम
वाराणसी। संसद भवन परिसर में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर सांसद पप्पू यादव द्वारा किए गए कथित प्रदर्शन के विरोध में देशभर से काशी पहुंचे संतों ने पप्पू यादव, राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद की गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी है। तीनों के खिलाफ वाराणसी में एफआईआर दर्ज कराने वाले पाताल पुरी मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालक देवाचार्य ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो संत समाज हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।
एफआईआर दर्ज कराने वाले संत ने बढ़ाया दबाव
जगद्गुरु बालक देवाचार्य ने कहा कि इस पूरे प्रकरण को लेकर वाराणसी में तीनों नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि कानून के अनुसार शीघ्र कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि यदि आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी नहीं होती है तो संत समाज न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेते हुए उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक जाएगा।
संसद परिसर की घटना पर जताई नाराजगी
संतों का कहना है कि संसद भवन परिसर में सांसद पप्पू यादव ने भगवा वेश धारण कर राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर कथित प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि इस दौरान कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद भी उनके साथ मौजूद थे। संत समाज ने इस पूरे घटनाक्रम को सनातन धर्म और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।
देशभर में बढ़ रहा विरोध
इस घटना के बाद विभिन्न राज्यों में संतों और हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शन, ज्ञापन और विरोध सभाओं के माध्यम से कार्रवाई की मांग उठाई जा रही है। संतों का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों पर इस प्रकार के कथित प्रदर्शन से समाज में गलत संदेश गया है, इसलिए मामले में निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
आंदोलन को और तेज करने की तैयारी
अखिल भारतीय संत समिति की बैठक में मौजूद संतों ने संकेत दिए कि यदि प्रशासन की ओर से समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। संत समाज का कहना है कि यह केवल किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि सनातन धर्म और धार्मिक आस्था के सम्मान का विषय है। इसी कारण अब इस मुद्दे को कानूनी और लोकतांत्रिक दोनों स्तरों पर आगे बढ़ाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की शरण भी ली जाएगी।

