IMS BHU में 3.68 करोड़ की मशीन खरीद की जांच तेज, तीसरे दिन ऑपरेशन थिएटर पहुंची विजिलेंस टीम
वाराणसी। आईएमएस-बीएचयू के सर्जरी विभाग के लिए खरीदी गई करीब 3.68 करोड़ रुपये की सर्जिकल मशीन की खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच तीसरे दिन भी जारी रही। केंद्र सरकार के निर्देश पर दिल्ली से पहुंची विजिलेंस टीम ने शुक्रवार को सर्जरी विभाग के ऑपरेशन थिएटर का निरीक्षण कर मशीन की तकनीकी स्थिति, उपयोगिता और खरीद प्रक्रिया से जुड़े अभिलेखों की गहन पड़ताल की। जांच के दौरान टीम ने मशीन के भौतिक सत्यापन के साथ ही उससे संबंधित दस्तावेजों का भी मिलान किया।
विजिलेंस अधिकारियों ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से हुई खरीद प्रक्रिया से संबंधित फाइलों का विस्तार से अध्ययन किया। टीम ने यह जांचने का प्रयास किया कि मशीन की खरीद निर्धारित वित्तीय नियमों, निविदा प्रक्रिया और तकनीकी मानकों के अनुरूप हुई थी या नहीं। इसके अलावा अनुमोदन, भुगतान और तकनीकी समिति की रिपोर्ट सहित सभी अभिलेखों का परीक्षण किया गया।
जांच के दौरान विजिलेंस टीम ने आईएमएस-बीएचयू में खरीदी गई मशीन की तुलना देश के अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों से भी की। सूत्रों के अनुसार श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में इसी श्रेणी की मशीन लगभग 60 लाख रुपये तथा एम्स नई दिल्ली में करीब 66 लाख रुपये में खरीदी गई थी, जबकि आईएमएस-बीएचयू में इसी प्रकार की मशीन की कीमत 3.68 करोड़ रुपये प्रति मशीन दर्ज होने का मामला सामने आया है। इसी भारी मूल्य अंतर को जांच का प्रमुख आधार माना जा रहा है और टीम इस अंतर के कारणों की पड़ताल कर रही है।
शुक्रवार को विजिलेंस टीम ने ऑपरेशन थिएटर में पहुंचकर मशीन की स्थापना, कार्यप्रणाली और तकनीकी विनिर्देशों का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि खरीद के समय जिन तकनीकी विशेषताओं का उल्लेख किया गया था, वे वास्तविक मशीन से मेल खाती हैं या नहीं। जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण बिंदु सामने आया। दस्तावेजों में चार मशीनों के स्थान पर 4.412 मशीन का उल्लेख मिलने पर टीम ने इसे भी जांच के दायरे में शामिल किया है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि खरीद की मात्रा दशमलव में किस आधार पर दर्ज की गई और इसके पीछे कोई तकनीकी अथवा वित्तीय कारण था या नहीं।
इससे पहले शुक्रवार सुबह विजिलेंस अधिकारियों ने एलडी गेस्ट हाउस में खरीद प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से दोबारा पूछताछ की। कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया गया। सूत्रों के मुताबिक जांच शनिवार को भी जारी रह सकती है। पूरी जांच के बाद विजिलेंस टीम अपनी विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, नियमों की अनदेखी या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका रही है या नहीं। यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल चिकित्सा और शैक्षणिक जगत की नजर इस बहुचर्चित मामले की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

