BHU और पंजाब यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की जांच में 169 साल बाद हुआ अजनाला कांड का बड़ा खुलासा, 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों ने छिपाया था सच
वाराणसी। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी अजनाला की घटना में बीएचयू के वैज्ञानिकों की जांच ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। कुएं से मिले सैकड़ों कंकालों की जांच में पता चला कि अंग्रेजों ने भारतीय सैनिकों की हत्या कर उनके शवों पर चूना और कोयला डालकर सबूत मिटाने की कोशिश की थी।

कुएं से मिले सैकड़ों कंकाल, खुला इतिहास का राज
वर्ष 2014 में पंजाब के अजनाला स्थित एक पुराने कुएं की खुदाई के दौरान सैकड़ों कंकाल बरामद हुए थे। यह खुदाई सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र कोछड़ के प्रयासों से संभव हो सकी। इस खोज ने 1857 के विद्रोह के एक भूले-बिसरे अध्याय को उजागर कर दिया।

वैज्ञानिक जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
कंकालों की जांच के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. जे.एस. सहरावत के नेतृत्व में टीम गठित की गई। इसमें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे और अन्य विशेषज्ञ भी शामिल रहे।
साथ ही सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने डीएनए जांच में सहयोग किया। जांच के दौरान यह सामने आया कि अंग्रेजों ने शवों पर चूना और कोयला डाल दिया था, जिससे डीएनए तेजी से नष्ट हो गया और पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया।

सीमित नमूनों से ही मिल पाया डीएनए
कुल 244 नमूनों में से लगभग 100 नमूने जांच के लिए भेजे गए, लेकिन केवल करीब 50 नमूनों से ही सफलतापूर्वक डीएनए निकाला जा सका। वैज्ञानिकों के अनुसार, खुदाई का वैज्ञानिक तरीके से न होना और चूना-कोयले का इस्तेमाल डीएनए के नष्ट होने की मुख्य वजह रहा।
गंगा घाटी से जुड़े थे शहीद सैनिक
डीएनए जांच में जो सबसे अहम तथ्य सामने आया, वह यह था कि अजनाला में दफन किए गए सैनिक गंगा घाटी क्षेत्र के निवासी थे। यानी इनका संबंध उत्तर प्रदेश और बिहार के क्षेत्रों से था, जिनमें वाराणसी और आसपास के इलाके भी शामिल हैं।
1857 के विद्रोह का क्रूर अध्याय
इतिहासकारों के मुताबिक 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों ने विद्रोही भारतीय सैनिकों को पकड़कर सामूहिक रूप से मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद उनके शवों को अजनाला के कुएं में डालकर छिपा दिया गया। यह घटना अंग्रेजी शासन की क्रूरता और अमानवीयता का एक बड़ा उदाहरण मानी जाती है।
शहीदों की पहचान और सम्मान की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वैज्ञानिक जांच से इतिहास के अनछुए पहलुओं पर रोशनी पड़ती है। साथ ही, शहीदों की पहचान कर उन्हें सम्मान देने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

