IIT BHU में भूकंप-रोधी अवसंरचना पर अंतरराष्ट्रीय मंथन, ICSRI-2026 सम्मेलन का हुआ शुभारंभ

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वाराणसी। आईआईटी बीएचयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा इंडियन सोसाइटी ऑफ अर्थक्वेक टेक्नालॉजी (ISET) के सहयोग से शुक्रवार को “इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन सीस्मिक रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (ICSRI-2026)” का शुभारंभ संस्थान के एबीएलटी-4 सभागार में हुआ। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य भूकंप अभियंत्रण, भूकंपीय जोखिमों से सुरक्षा और सुरक्षित एवं सुदृढ़ अवसंरचना के विकास से जुड़े नवीन शोध, तकनीकों और व्यावहारिक समाधानों पर विचार-विमर्श करना है।

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कार्यक्रम की शुरुआत महामना की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने तथा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद संस्थान का कुलगीत प्रस्तुत किया गया, जिससे कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो. पीआर मैती ने स्वागत भाषण में कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और अभियंताओं को एक साझा मंच प्रदान करते हैं। ऐसे मंचों पर विशेषज्ञ अपने अनुभव, शोध परिणाम और तकनीकी नवाचार साझा करते हैं, जिससे भूकंप-रोधी अवसंरचना के विकास की दिशा में नई संभावनाएं खुलती हैं।

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सम्मेलन की संयोजक डॉ. सुप्रिया मोहंती ने अपने प्रारंभिक वक्तव्य में सम्मेलन के उद्देश्यों की जानकारी दी और बताया कि इसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में विशेषज्ञ, शोधकर्ता और अभियंता भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से भूकंप से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए नई तकनीकों और शोध आधारित समाधानों पर चर्चा की जाएगी।

इस अवसर पर Indian Society of Earthquake Technology के अध्यक्ष प्रो. बी.के. महेश्वरी ने भूकंप अभियंत्रण के क्षेत्र में निरंतर अनुसंधान और तकनीकी नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तेजी से शहरीकरण और बढ़ते अवसंरचनात्मक विकास के बीच सुरक्षित निर्माण तकनीकों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए निदेशक अमित पात्रा ने कहा कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए मजबूत और लचीले अवसंरचनात्मक ढांचे का निर्माण समय की मांग है। उन्होंने इस दिशा में शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और उद्योग जगत के बीच सहयोग को और सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया।

संस्थान के डीन (अनुसंधान एवं विकास) प्रो. राजेश कुमार ने बताया कि आईआईटी (बीएचयू) भूकंप अभियंत्रण, संरचनात्मक सुरक्षा और आपदा न्यूनीकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध कार्य कर रहा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीएसआईआर रुड़की के निदेशक आर प्रदीप कुमार ने कहा कि भूकंप-संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षित और टिकाऊ अवसंरचना का विकास आज की प्रमुख आवश्यकता है। उन्होंने आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों और अनुसंधान आधारित समाधानों को अपनाने पर विशेष जोर दिया। इस अवसर पर उनके विशिष्ट योगदान के लिए आयोजकों द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम के अंत में आयोजन सचिव डॉ. महेंद्र कुमार पाल ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन से जुड़े लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह सम्मेलन भूकंप अभियंत्रण और अवसंरचना सुरक्षा से जुड़े देश-विदेश के विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और अभियंताओं को एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा, जहां वे अपने नवीन शोध, तकनीकों और अनुभवों को साझा करेंगे।

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