काशी के प्रबुद्धजनों ने नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल का किया अभिनंदन, हिंदी और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रयासों को सराहा

WhatsApp Channel Join Now

वाराणसी। काशी की अस्सी स्थित पप्पू चाय की अड़ी पर रविवार को सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। शहर के प्रबुद्धजनों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल का माल्यार्पण, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया। इस अवसर पर उनके नेतृत्व में संस्था में आए सकारात्मक बदलावों, हिंदी भाषा के संवर्धन तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई।

123

समारोह में वक्ताओं ने कहा कि व्योमेश शुक्ल के नेतृत्व में नागरी प्रचारिणी सभा में नई ऊर्जा और सक्रियता का संचार हुआ है। संस्था की कार्यशैली में पारदर्शिता बढ़ी है, गतिविधियों का विस्तार हुआ है और साहित्यकारों, शोधार्थियों तथा हिंदी प्रेमियों की भागीदारी पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। उनका कहना था कि लंबे समय बाद यह ऐतिहासिक संस्था फिर से साहित्यिक और बौद्धिक विमर्श का प्रमुख केंद्र बनती दिखाई दे रही है।

123

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अशोक पांडे ने नागरी प्रचारिणी सभा के गौरवशाली इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि के प्रचार-प्रसार में इस संस्था का योगदान ऐतिहासिक और अविस्मरणीय रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से ही यह संस्था हिंदी साहित्य के संरक्षण, दुर्लभ ग्रंथों के प्रकाशन, शोध कार्यों तथा भाषा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। उन्होंने कहा कि समय के साथ संस्था की गरिमा को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी और वर्तमान नेतृत्व इस दिशा में प्रभावी पहल कर रहा है।

123

सम्मान ग्रहण करने के बाद व्योमेश शुक्ल ने कहा कि काशी जैसे ज्ञान और विद्वता की नगरी के प्रबुद्धजनों से सम्मान प्राप्त होना उनके लिए किसी बड़े पुरस्कार से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि काशी के विद्वानों का विश्वास और स्नेह उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है तथा यही उन्हें संस्था के विकास के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की शक्ति देता है।

उन्होंने बताया कि नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना स्वतंत्रता से पूर्व क्वींस कॉलेज के तीन विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि के संरक्षण एवं विकास के उद्देश्य से की थी। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य सभा को केवल एक ऐतिहासिक संस्था तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी अध्ययन, शोध और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाना है। उनका संकल्प है कि भविष्य में काशी आने वाला प्रत्येक व्यक्ति नागरी प्रचारिणी सभा का भी अवश्य भ्रमण करे और इसकी ऐतिहासिक धरोहरों से परिचित हो।

व्योमेश शुक्ल ने कहा कि संस्था में सुरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों, ग्रंथों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के डिजिटल संरक्षण, शोध गतिविधियों के विस्तार तथा सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा देने की दिशा में योजनाबद्ध कार्य किए जा रहे हैं। इससे देश-विदेश के शोधार्थियों और हिंदी प्रेमियों को महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।

कार्यक्रम का संचालन रामयश मिश्रा ने किया। इस अवसर पर काशी के अनेक साहित्यकार, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान नेतृत्व में नागरी प्रचारिणी सभा एक बार फिर हिंदी भाषा, साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की अग्रणी राष्ट्रीय संस्था के रूप में नई पहचान स्थापित करेगी।

Share this story