आयुर्वेदिक अनुसंधान को मजबूती देने की पहल, ‘मरकरी बैंक’ स्थापित करने की मांग, BHU प्रोफेसर ने पीएम को लिखा पत्र
वाराणसी। आयुर्वेदिक औषधियों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने महत्वपूर्ण पहल की है। आईएमएस-बीएचयू के रसशास्त्र विभाग के प्रो. आनंद चौधरी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर देशभर के चिकित्सा एवं शोध संस्थानों में ‘मरकरी बैंक’ स्थापित करने की मांग उठाई है।
अपने पत्र में प्रो. चौधरी ने आयुर्वेदिक औषधि निर्माण में पारे (मरकरी) की अहम भूमिका को रेखांकित किया है। उन्होंने बताया कि रसौषधियां, जिनमें जड़ी-बूटियों के साथ धातुओं और खनिजों का संयोजन होता है, आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण शाखा हैं। इन औषधियों की गुणवत्ता और सुरक्षा काफी हद तक प्रयुक्त पारे की शुद्धता और मानकीकरण पर निर्भर करती है।
इस विषय पर हाल ही में गुजरात के जामनगर में 6 और 7 मार्च को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद 17 मार्च को एक घोषणा पत्र जारी किया गया, जिसमें आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण और शोध को सुदृढ़ करने के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा प्रस्तुत की गई। इसी घोषणा पत्र के आधार पर ‘मरकरी बैंक’ की स्थापना का सुझाव प्रमुख रूप से सामने आया है।
प्रो. चौधरी ने कहा कि प्रस्तावित मरकरी बैंक से देश के आयुर्वेदिक शोध संस्थानों को शुद्ध, प्रमाणित और मानकीकृत पारे की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे न केवल औषधियों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि उनकी विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। साथ ही, शोध कार्यों में एकरूपता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि इस पहल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस), विभिन्न नियामक संस्थाएं और आयुर्वेदिक औषधि निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों की सहभागिता रही है। यह दर्शाता है कि आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रो. चौधरी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि इस प्रस्ताव पर नीति स्तर पर विचार करते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उनका मानना है कि ‘मरकरी बैंक’ की स्थापना से आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी तथा भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को नई पहचान प्राप्त होगी।

