वाराणसी में गंगा किनारे बनेगा देश का पहला किन्नर आश्रम, तलाशी जा रही जमीन 

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वाराणसी। किन्नर समुदाय द्वारा वाराणसी में देश का पहला ट्रांसजेंडर आश्रम स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। गंगा किनारे बनने वाले आश्रम का उद्देश्य बुजुर्ग किन्नरों और परित्यक्त बच्चों को सुरक्षित आश्रय और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। इस प्रस्तावित आश्रम के लिए गंगा नदी के किनारे उपयुक्त भूमि की तलाश जारी है।

इस पहल की जानकारी किन्नर समुदाय की अध्यक्ष सलमा किन्नर ने दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में किन्नर समुदाय के लिए कोई स्थायी और समर्पित आश्रय स्थल नहीं है। इसके चलते उम्रदराज किन्नरों को जीवन के अंतिम चरण में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए वाराणसी में इस आश्रम की योजना बनाई गई है, जहां उन्हें सम्मानपूर्वक रहने की सुविधा मिल सके।

उन्होंने बताया कि इस आश्रम का निर्माण और संचालन समाजसेवियों तथा आम नागरिकों के सहयोग से किया जाएगा। इसमें रहने, खाने-पीने, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सामूहिक सहयोग से सुनिश्चित की जाएगी। खासतौर पर उन बच्चों पर ध्यान दिया जाएगा, जिन्हें उनके परिवारों द्वारा छोड़ दिया जाता है या जो सामाजिक परिस्थितियों के कारण असुरक्षित जीवन जीने को मजबूर होते हैं।

आश्रम में 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग किन्नरों के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में अपना जीवन व्यतीत कर सकें। साथ ही, नाबालिग बच्चों को भी संरक्षण प्रदान कर उन्हें शिक्षा और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। सलमा किन्नर ने बताया कि ऐसे कई बच्चे ट्रेनों, बसों और अन्य स्थानों पर जोखिम भरे कार्यों में लगे रहते हैं, जिन्हें इस आश्रम के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ने की योजना है।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू आत्मनिर्भरता भी है। आश्रम के साथ रोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे, ताकि वहां रहने वाले लोग खुद अपने पैरों पर खड़े हो सकें। रोजगार से होने वाली आय का उपयोग आश्रम में रहने वाले लोगों की जरूरतों जैसे भोजन, कपड़े और शिक्षा को पूरा करने में किया जाएगा।

सलमा किन्नर ने समाज के लोगों और संस्थाओं से अपील की है कि वे इस सामाजिक पहल में सहयोग करें और गुलिस्ता एकता किन्नर ट्रस्ट के माध्यम से जुड़कर इस प्रयास को सफल बनाने में योगदान दें। यह पहल न केवल किन्नर समुदाय के उत्थान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि समाज में समानता और समावेशिता का संदेश भी देती है।

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