बीएचयू में SIR के विरोध में दिशा छात्र संगठन ने निकाला लोकतांत्रिक अधिकार मार्च, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
वाराणसी। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के विरोध और मताधिकार की रक्षा की मांग को लेकर शनिवार को बीएचयू में दिशा छात्र संगठन की ओर से लोकतांत्रिक अधिकार मार्च निकाला गया। विश्वनाथ मंदिर से महिला महाविद्यालय (एमएमवी) तक निकाले गए मार्च में शामिल लोगों ने SIR को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए मतदाता सूची में प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सुरक्षित रखने की मांग की गई।
मार्च के आयोजकों ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का खतरा है। इस प्रक्रिया से करीब 13 करोड़ लोगों के मताधिकार पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए नागरिकों से इसके खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।

मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया पर जताई चिंता
आयोजकों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि फॉर्म-6 में माता-पिता और दादा-दादी से संबंधित जानकारी मांगे जाने तथा दस्तावेजों की अनिवार्यता से नए मतदाताओं के पंजीकरण में कठिनाई आ सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि आवश्यक दस्तावेज जुटाने में परेशानी होने पर गरीब, मजदूर और वंचित वर्ग के लोग मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित रह सकते हैं।
आयोजकों ने कहा कि इसका असर दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ने की आशंका है। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में ऐसी व्यवस्था अपनाई जाए, जिससे किसी भी पात्र नागरिक का नाम अनावश्यक रूप से न कटे और मताधिकार की रक्षा सुनिश्चित हो।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
मार्च में शामिल लोगों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। आयोजकों का आरोप है कि नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव के बाद चयन प्रक्रिया में केंद्र सरकार का प्रभाव बढ़ा है, जिससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं। इसके अलावा EVM, VVPAT पर्चियों की गिनती, मतदान प्रतिशत में बदलाव, सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने और मतगणना में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दे भी उठाए गए। आयोजकों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और संबंधित सवालों का स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
SIR वापस लेने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि SIR प्रक्रिया को वापस लिया जाए और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की जिम्मेदारी केवल नागरिकों पर डालने के बजाय ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे प्रत्येक पात्र व्यक्ति अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सके। मार्च के माध्यम से आयोजकों ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।

