वैश्विक शोध जगत में IIT (BHU) का परचम, रिसर्च डॉट कॉम रैंकिंग में नौ वैज्ञानिकों को मिली जगह

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वाराणसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (BHU) ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी शोध उत्कृष्टता का परचम लहराया है। अमेरिका स्थित प्रतिष्ठित वैश्विक रिसर्च रैंकिंग मंच “Research.com” द्वारा जारी “World’s Best Scientists Rankings 2026” में संस्थान के नौ वैज्ञानिकों को स्थान मिला है। इस उपलब्धि ने न केवल IIT (BHU) की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी है, बल्कि वैश्विक शोध समुदाय में संस्थान की मजबूत उपस्थिति को भी रेखांकित किया है।

रैंकिंग में शामिल वैज्ञानिकों में रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. योगेश चन्द्र शर्मा, मटेरियल्स साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के प्रो. प्रलय मैती, प्रो. राजीव प्रकाश और डॉ. अनुज कुमार, बायोकेमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. प्रांजल चन्द्रा, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. जहर सरकार, केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. राम शरण सिंह तथा इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. सत्यव्रत जित और प्रो. सोमक भट्टाचार्य शामिल हैं।

बताया गया कि Research.com द्वारा यह रैंकिंग वैज्ञानिकों के शोध कार्य, वैश्विक उद्धरण, एच-इंडेक्स तथा डिसिप्लिन एच-इंडेक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर तैयार की जाती है। इन मानकों के जरिए किसी वैज्ञानिक के शोध की गुणवत्ता, प्रभाव और वैज्ञानिक समुदाय में उसके योगदान का आकलन किया जाता है। ऐसे में इस सूची में स्थान मिलना किसी भी संस्थान और वैज्ञानिक के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

संस्थान के कई वैज्ञानिक पहले भी Elsevier द्वारा जारी “World’s Top 2% Scientists” सूची में शामिल हो चुके हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि IIT (BHU) के शोधकर्ता लगातार उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्य कर रहे हैं और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए IIT (BHU) के निदेशक अमित पात्रा ने कहा कि Research.com की प्रतिष्ठित रैंकिंग में संस्थान के नौ संकाय सदस्यों का चयन पूरे IIT (BHU) परिवार के लिए गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि यह सफलता संस्थान में हो रहे उच्चस्तरीय शोध, नवाचार और वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है।

उन्होंने आगे कहा कि IIT (BHU) शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ अंतर्विषयी सहयोग को भी प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में समाजोपयोगी और प्रभावशाली योगदान सुनिश्चित किया जा सके। उनके अनुसार यह उपलब्धि संस्थान की अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक साख को और मजबूत करेगी।

संस्थान प्रशासन ने बताया कि यह सफलता उच्च गुणवत्ता वाले शोध, वैश्विक अकादमिक सहयोग और बहुविषयी वैज्ञानिक कार्यों को निरंतर प्रोत्साहन देने का परिणाम है। संस्थान के शोधकर्ताओं की इस उपलब्धि से विद्यार्थियों और युवा वैज्ञानिकों को भी नई प्रेरणा मिलेगी।

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