RISE@IITs 2026 में IIT (BHU) के छात्रों का परचम, जीता प्रथम पुरस्कार

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वाराणसी। आईआईटी बीएचयू के छात्रों ने एक बार फिर अपनी नवाचार क्षमता का लोहा मनवाया है। आईआईटी हैदराबाद में आयोजित प्रतिष्ठित इंटर-आईआईटी अंडरग्रेजुएट इनोवेशन मीट - RISE@IITs 2026 में आईआईटी (बीएचयू) की छात्र टीम ने प्रथम पुरस्कार हासिल कर संस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया। इस उपलब्धि से न केवल आईआईटी (बीएचयू) बल्कि वाराणसी का नाम भी देशभर में रोशन हुआ है।

विजेता टीम में अर्क्य ज्योति घोष और सुप्रतीम महापात्रा शामिल हैं, जिन्होंने स्कूल ऑफ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. प्रांजल चंद्रा के मार्गदर्शन में यह अभिनव तकनीक विकसित की। टीम को उनके प्रोजेक्ट “हैंडहेल्ड माइक्रो-इमेजिंग डिवाइस” के लिए ₹5 लाख की नकद पुरस्कार राशि और विजेता शील्ड प्रदान की गई। यह अत्याधुनिक, कम लागत वाली इमेजिंग तकनीक आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी में विकसित की गई है।

इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर के विभिन्न आईआईटी से सैकड़ों नवाचार प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। कड़े मूल्यांकन के बाद केवल 26 नवाचारों को आईआईटी हैदराबाद में लाइव डेमोंस्ट्रेशन के लिए चुना गया। इनमें आईआईटी (बीएचयू) का यह प्रोजेक्ट शीर्ष छह फाइनलिस्ट्स में शामिल हुआ और अंतिम चरण में सभी प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ते हुए विजेता बना।

शीर्ष छह टीमों ने अपने कार्यशील प्रोटोटाइप एक प्रतिष्ठित जूरी पैनल के समक्ष प्रस्तुत किए, जिसमें जाने-माने टेक्नोक्रेट्स, वरिष्ठ सरकारी एवं आईएएस अधिकारी, नीति-निर्माता और कार्यान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल थे। मूल्यांकन के दौरान तकनीकी उत्कृष्टता के साथ-साथ सामाजिक प्रासंगिकता, किफायत, स्केलेबिलिटी और व्यावहारिक उपयोगिता को प्रमुखता से परखा गया।

हैंडहेल्ड माइक्रो-इमेजिंग डिवाइस ने अपनी पोर्टेबिलिटी, कम लागत और शिक्षा, अनुसंधान तथा पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक्स में संभावित उपयोग के कारण जूरी का विशेष ध्यान आकर्षित किया। यह डिवाइस संसाधन-सीमित क्षेत्रों में भी सटीक माइक्रोस्कोपी समाधान प्रदान करने में सक्षम है। पुरस्कार वितरण समारोह में पद्मश्री डॉ. बीवीआर मोहन रेड्डी, आईएएस जयेश रंजन और आईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. बीएस. मूर्ति सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने छात्र टीम और उनके मार्गदर्शक को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की नवाचार-संस्कृति और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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