करसड़ा में विकसित होगा विशाल इको फॉरेस्ट, काशी को मिलेगा नया हरित क्षेत्र

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वाराणसी। शहर को हराभरा और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में नगर निगम ने एक और महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। डोमरी में विकसित किए गए वन क्षेत्र की सफलता के बाद अब करसड़ा में विशाल इको फॉरेस्ट तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। नगर निगम इस परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने में जुट गया है। इस वन क्षेत्र को केवल पौधरोपण तक सीमित न रखकर एक आत्मनिर्भर इको-सिस्टम के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ नगर निगम को भविष्य में आर्थिक लाभ भी मिल सके।

नगर निगम की योजना के तहत करसड़ा में मियावाकी तकनीक आधारित घना वन विकसित किया जाएगा। इस तकनीक के जरिए कम जगह में अधिक पौधे लगाए जाते हैं, जिससे वन तेजी से विकसित होता है और पर्यावरणीय संतुलन बेहतर होता है। परियोजना का उद्देश्य शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाकर वायु प्रदूषण कम करना और नागरिकों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के घने वन क्षेत्र शहर के तापमान को नियंत्रित करने और जैव विविधता को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

योजना के अंतर्गत यहां बड़ी संख्या में फलदार, औषधीय और फूलों वाले पौधे लगाए जाएंगे। फलदार पौधों में आम, अमरूद, पपीता और अनार जैसे वृक्ष शामिल होंगे, जबकि औषधीय पौधों में अश्वगंधा, शतावरी, गिलोय और एलोवेरा लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त गुलाब, चमेली और पारिजात जैसे सुगंधित एवं सजावटी फूलों के पौधे भी लगाए जाएंगे। नगर निगम का मानना है कि अगले पांच वर्षों में इन पौधों से फल, फूल और औषधीय उत्पादों के रूप में आय प्राप्त होने लगेगी, जिससे यह परियोजना आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित होगी।

वन क्षेत्र को आधुनिक स्वरूप देने के लिए यहां वैज्ञानिक तरीके से सिंचाई की व्यवस्था की जाएगी। पूरे क्षेत्र में पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा ताकि पौधों को नियमित रूप से पर्याप्त पानी मिल सके। आधुनिक सिंचाई प्रणाली से पानी की बर्बादी भी कम होगी और पौधों की बेहतर देखभाल संभव हो सकेगी। इसके साथ ही नागरिकों के भ्रमण के लिए पाथवे भी तैयार किए जाएंगे, ताकि लोग प्रकृति के बीच समय बिता सकें और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक हो सकें।

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण और शहरीकरण को देखते हुए शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि डोमरी में नगर निगम द्वारा किए गए पौधरोपण के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं और उसी मॉडल को करसड़ा में और अधिक व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाएगा। स्थानीय लोगों ने भी इस योजना का स्वागत किया है। लोगों का मानना है कि यदि शहर में इस प्रकार के अधिक हरित क्षेत्र विकसित किए जाएं तो बढ़ती गर्मी और प्रदूषण से काफी हद तक राहत मिल सकती है। आने वाले समय में करसड़ा का यह इको फॉरेस्ट पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन और आय का भी नया केंद्र बन सकता है।

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