कैसे मनेगी पुष्कर तालाब पर देव दीपावली, छह महीने भी नहीं टिकतीं सीढ़ियां

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4.5 करोड़ रुपये से हुआ था सुंदरीकरण, बार-बार धंस रहीं सीढ़ियां

मरम्मत के कुछ दिन बाद फिर बिगड़ी हालत, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

देव दीपावली से पहले ऐतिहासिक तालाब की बदहाली ने बढ़ाई चिंता, जागृति फाउंडेशन ने नगर आयुक्त से तत्काल मरम्मत कराने की लगाई गुहार

2004 में शुरू हुआ था पुष्कर तालाब को बचाने का अभियान, सीएंडडीएस ने करीब 4.5 करोड़ रुपये से कराया था सुंदरीकरण

मरम्मत के कुछ दिन बाद ही फिर धंसने लगीं सीढ़ियां, हर वर्ष जागृति फाउंडेशन कराता है भव्य देव दीपावली का आयोजन

वाराणसी। काशी की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत पुष्कर तालाब की बदहाली एक बार फिर उजागर हो गई है। देव दीपावली नजदीक है और तालाब की सीढ़ियां फिर से धंसने लगी हैं। हैरानी की बात यह है कि करीब 4.5 करोड़ रुपये खर्च कर कराए गए सुंदरीकरण के बाद भी सीढ़ियां छह महीने तक नहीं टिक पा रही हैं। कुछ दिन पहले ही क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन अब फिर से सीढ़ियों का हिस्सा धंस गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस बार पुष्कर तालाब पर देव दीपावली का भव्य आयोजन कैसे होगा? निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए सामाजिक संस्था जागृति फाउंडेशन ने नगर आयुक्त से तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है।

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पुष्कर तालाब का धार्मिक महत्व प्राचीन काल से रहा है। मान्यता है कि भगवान शंकर के काशी आगमन के समय उनका प्रथम जलाभिषेक इसी तालाब के जल से हुआ था। शिव पुराण समेत कई धार्मिक ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है। यह तालाब धार्मिक आस्था के साथ काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, लंबे समय तक उपेक्षा के कारण इसकी स्थिति बदहाल हो गई थी।

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2004 में शुरू हुआ था तालाब बचाने का अभियान
पुष्कर तालाब को अस्तित्व बचाने के लिए वर्ष 2004 में अभियान शुरू किया गया था। सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों के सामूहिक प्रयास से तालाब की सफाई कराई गई। इस अभियान में संत मुरारी बापू, पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा, तत्कालीन मंडलायुक्त एवं जिलाधिकारी रमेश नितिन गोकर्ण, रमेश उपाध्याय, तत्कालीन नगर आयुक्त लालजी राय, बाबा हरदेव सिंह, एडीएम सिटी रहे नलिन अवस्थी और अटल राय सहित कई लोगों का योगदान रहा।

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रामनगर पीएसी के जवानों, बीएचयू के एनसीसी कैडेटों, वाराणसी नागरिक समाज, केंद्रीय देव दीपावली महासमिति और शहर की विभिन्न संस्थाओं ने भी श्रमदान किया। नगर निगम और जिला प्रशासन के सहयोग से तालाब से जलकुंभी और खरपतवार हटाए गए। सामूहिक प्रयासों से तालाब को फिर से स्वच्छ और सुंदर बनाने की पहल हुई।

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4.5 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं सुधरी स्थिति
तालाब की सफाई के बाद केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश सरकार ने इसके सुंदरीकरण की जिम्मेदारी सीएंडडीएस संस्था को सौंपी। करीब 4.5 करोड़ रुपये की लागत से सीढ़ियों, दीवारों और पाथ-वे सहित अन्य निर्माण कार्य कराए गए। उद्देश्य था कि तालाब की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को संरक्षित करने के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएं।

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हालांकि, निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ समय बाद ही सीढ़ियां क्षतिग्रस्त होने लगीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में गुणवत्ता और मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। यही वजह है कि बार-बार मरम्मत के बावजूद सीढ़ियों के धंसने का सिलसिला थम नहीं रहा है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलना जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

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हर साल सैकड़ों दीपों से जगमगाता है परिसर
पुष्कर तालाब पर हर वर्ष जागृति फाउंडेशन के तत्वावधान में देव दीपावली का भव्य आयोजन किया जाता है। शुरुआत में स्थानीय लोगों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से दीपोत्सव मनाया जाता था। बाद में जिला प्रशासन की ओर से तेल और दीपों की व्यवस्था में सहयोग मिलने लगा। इससे आयोजन का स्वरूप और भव्य हो गया।

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देव दीपावली पर तालाब की सीढ़ियों और आसपास के परिसर में सैकड़ों दीप जलाए जाते हैं। दीपों की रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठता है। इस आयोजन में स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी पहुंचते हैं। यह आयोजन क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बन चुका है। लेकिन इस बार क्षतिग्रस्त सीढ़ियों ने आयोजन की तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जर्जर हिस्सों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही दुर्घटना का कारण बन सकती है।

नगर आयुक्त से स्थायी समाधान की मांग
जागृति फाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र ने कहा कि पुष्कर तालाब की सीढ़ियां बार-बार क्षतिग्रस्त हो रही हैं। हर वर्ष यहां देव दीपावली का आयोजन होता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में आयोजन की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने नगर आयुक्त से तत्काल सीढ़ियों की मरम्मत कराने की मांग की, ताकि दीपोत्सव भव्य रूप से संपन्न हो सके।

उन्होंने कहा कि पुष्कर तालाब काशी की धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर है। इसकी सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है। केवल बार-बार मरम्मत कराने से समस्या का समाधान नहीं होगा। निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराकर सीढ़ियों के धंसने के कारणों का पता लगाना और स्थायी समाधान करना जरूरी है। अब देखना यह है कि देव दीपावली से पहले नगर निगम इस दिशा में कितनी तत्परता दिखाता है।

BK Pathak
BK Pathak

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Beerkeshwar Pathak Journalist Beerkeshwar Pathak, who entered the field of journalism in 2015, has nearly a decade of experience in print and digital media. He holds a postgraduate diploma in journalism and has established his reputation through reporting at prestigious media outlets like Amar Ujala, Hindustan, and Dainik Jagran. He has a special interest and expertise in reporting on political and social issues, news analysis, and editing, along with eventful news. He currently serves as an editor at Live VNS, a leading digital news platform in Varanasi. In this role, he is contributing to reshaping digital journalism and delivering important information to readers through factual and reliable news. Factual investigation of news and effective editing are key aspects of his journalism.

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