बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर और एबीवीपी कार्यकर्ताओं में तीखी बहस, सात दिन में कार्रवाई की मांग
छात्रहित, सुरक्षा और कार्यक्रम की अनुमति को लेकर आमने-सामने आए दोनों पक्ष, हॉल शुल्क में अनियमितता का भी आरोप
वाराणसी। बीएचयू में शनिवार को एबीवीपी कार्यकर्ताओं और चीफ प्रॉक्टर के बीच छात्रहित के मुद्दों को लेकर तीखी बहस हो गई। विभिन्न समस्याओं और हाल में आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर जवाब मांगने पहुंचे कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें कई घंटे इंतजार कराया गया, लेकिन चीफ प्रॉक्टर मिलने नहीं पहुंचे। विरोध के बाद बातचीत शुरू हुई तो दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। एबीवीपी ने सात दिन के भीतर मांगों पर कार्रवाई कर जवाब देने की मांग की है।
बैठक के दौरान हुई बहस का वीडियो भी सामने आया है। एबीवीपी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि चीफ प्रॉक्टर ने बातचीत के दौरान मोबाइल फोन बाहर रखने को कहा। इस पर छात्रों ने आपत्ति जताई। आरोप है कि बातचीत के दौरान तेज आवाज में बात होने से माहौल गरमा गया। कुछ देर बाद चीफ प्रॉक्टर वहां से बाहर चले गए।

कार्यक्रम की अनुमति और हॉल शुल्क पर सवाल
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने हाल में राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा से जुड़े कार्यक्रम के आयोजन पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि हॉल की अनुमति छात्र कार्यक्रम के आधार पर ली गई थी, जबकि उसमें बड़ी संख्या में बाहरी लोग शामिल हुए। संगठन का दावा है कि हॉल का निर्धारित शुल्क करीब 55 हजार रुपये है, लेकिन कार्यक्रम के लिए शुल्क जमा नहीं कराया गया। कार्यकर्ताओं ने अनुमति प्रक्रिया, बाहरी लोगों के प्रवेश और शुल्क भुगतान की जांच की मांग की।
सुरक्षा व्यवस्था और बाहरी आवाजाही पर चिंता
एबीवीपी ने परिसर में बाहरी व्यक्तियों और वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने, काफिले, हूटर और तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई तथा प्रवेश के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। संगठन ने संवेदनशील स्थानों और छात्रावासों के मार्गों पर स्ट्रीट लाइट, सीसीटीवी कैमरे और नियमित सुरक्षा गश्त बढ़ाने की भी मांग रखी। बीएचयू इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच स्वस्थ एवं लोकतांत्रिक संवाद की परंपरा मजबूत होनी चाहिए। छात्रों के सवाल सुनकर समाधान की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए।
सुरक्षाकर्मियों के वेतन में अंतर का मुद्दा
संगठन ने दावा किया कि आईआईटी-बीएचयू के सुरक्षाकर्मियों को लगभग 30 हजार रुपये और बीएचयू के सुरक्षाकर्मियों को करीब 22 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है, जबकि दोनों लगभग आठ घंटे की ड्यूटी करते हैं। एबीवीपी ने वेतन अंतर पर प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था में पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता देने, कथित 25 प्रतिशत सिविलियन सुरक्षाकर्मियों की नियुक्ति के निर्णय पर पुनर्विचार और नई नियुक्ति नीति पारदर्शी बनाने की मांग की।
निष्पक्ष कार्रवाई और सात दिन में जवाब
एबीवीपी ने एफआईआर, हॉस्टल डिबारमेंट और समितियों के गठन जैसे मामलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की। संगठन का कहना है कि किसी छात्र के खिलाफ कार्रवाई तथ्यों और निर्धारित नियमों के आधार पर होनी चाहिए तथा उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। संगठन ने सात दिन के भीतर मांगों पर कार्रवाई और स्पष्ट जवाब देने की मांग की है। वहीं, कार्यक्रम की अनुमति, शुल्क भुगतान और सुरक्षा संबंधी आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आया है।

