काशी में रविवार को मनेगी हनुमान जयंती, संकट मोचन में सजेगी विशेष झांकी
- शनिवार से ही शुरू हो रही नरक चतुर्दशी, मगर रविवार सुबह मनाई जाएगी हनुमान जयंती
- भोर से शुरू होंगे बजरंगबली के दर्शन, सूर्योदय के बाद श्रद्धालुओं को मिलेगा विशेष शृंगार का दर्शन
- महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र करेंगे प्रसाद वितरण, संकट मोचन-बनकटी-पंचमुखी सहित प्रमुख मंदिरों में तैयारियां पूरी
वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में हनुमान जयंती को लेकर उत्साह चरम पर है। रविवार, आठ नवंबर को कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के अवसर पर हनुमान जयंती मनाई जाएगी। इसे लेकर काशी के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। संकट मोचन हनुमान मंदिर, दुर्गाकुंड के बनकटी हनुमान मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, बड़े हनुमान मंदिर और मैदागिन स्थित शांतिकरण हनुमान मंदिर सहित अन्य मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। शनिवार को मंदिरों में फूलों और रंग-बिरंगी सजावटी सामग्री से सजावट का काम चलता रहा. रविवार की सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है।
संकट मोचन मंदिर में वर्ष की विशेष झांकी के होंगे दर्शन
नगवा स्थित प्रसिद्ध संकट मोचन हनुमान मंदिर में हनुमान जयंती का विशेष आकर्षण वर्ष में एक बार होने वाली बजरंगबली की विशेष झांकी होगी। रविवार आठ नवंबर की भोर में मंदिर में धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजन-अर्चन और शृंगार की तैयारियां पूरी की जाएंगी। सूर्योदय के बाद श्रद्धालुओं के लिए विशेष झांकी के दर्शन प्रारंभ होंगे। इस विशेष अवसर पर भक्तों को बजरंगबली के आकर्षक स्वरूप का दर्शन प्राप्त होगा।

मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र भी इस धार्मिक आयोजन में मौजूद रहेंगे। वह स्वयं श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण करेंगे। हनुमान जयंती पर संकट मोचन मंदिर में दर्शन के लिए वाराणसी के साथ आसपास के जिलों और दूसरे स्थानों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। शनिवार को मंदिर में सजावट और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने का काम जारी रहा।
बनकटी और पंचमुखी हनुमान मंदिर में भी विशेष तैयारी
दुर्गाकुंड स्थित बनकटी हनुमान मंदिर में भी हनुमान जयंती को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर परिसर को आकर्षक रूप दिया जा रहा है। रविवार को यहां सुबह से ही श्रद्धालु पहुंचकर बजरंगबली का दर्शन-पूजन करेंगे। वहीं पंचमुखी हनुमान मंदिर में भी जयंती को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह है। मंदिर में पूजन-अर्चन के साथ श्रद्धालु हनुमान जी की आराधना करेंगे।
इसके अलावा नगवा स्थित बड़े हनुमान मंदिर और मैदागिन के शांतिकरण हनुमान मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। शहर के अन्य छोटे-बड़े हनुमान मंदिरों में भी विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। मंदिरों में भजन-कीर्तन और हनुमान चालीसा के पाठ से वातावरण भक्तिमय रहेगा।

शाम 4:36 से 6:15 बजे तक मेष लग्न में मनेगी हनुमत जयंती
वहीं ज्योतिषाचार्य पं. विकास शास्त्री के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि सात नवंबर शनिवार को सुबह 10:51 बजे शुरू हो चुकी है और आठ नवंबर को सुबह 10:57 बजे समाप्त होगी। मेष लग्न में हनुमत जयंती का विशेष उत्सव शाम 4:36 बजे से 6:15 बजे तक मनाया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से बजरंगबली का पूजन कर सकेंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, स्वाति नक्षत्र, मंगलवार और मेष लग्न में तुला राशि के संयोग में भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। इसी मान्यता के आधार पर इस दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। हालांकि मंदिरों में श्रद्धालुओं के दर्शन और पूजन का क्रम सुबह से ही जारी रहेगा।
सिंदूर और तिल के तेल से होगा बजरंगबली का शृंगार
हनुमान जयंती पर बजरंगबली के पूजन का विशेष विधान है। श्रद्धालु तिल के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को अर्पित करेंगे। इसके बाद उन्हें पुष्पमाला से सुशोभित किया जाएगा। नैवेद्य में मोदक, चूरमा और ऋतुफल अर्पित किए जाएंगे। भक्त हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, बजरंगबाण और रामायण का पाठ कर संकट मोचन से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और संकटों से मुक्ति की कामना करेंगे।
नरक चतुर्दशी पर यम दीपदान की भी परंपरा
हनुमान जयंती के साथ कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी के रूप में भी मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने नरकासुर का वध कर लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इस दिन शाम को यमराज के निमित्त घर के बाहर चार बत्तियों वाला दीपक जलाने की परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक विश्वास है कि दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
काशी में हनुमान जयंती और नरक चतुर्दशी के एक साथ पड़ने से रविवार को धार्मिक उत्सव का विशेष माहौल रहेगा। सुबह से मंदिरों में दर्शन-पूजन और शाम को विशेष लग्न में हनुमत आराधना के साथ पूरा शहर बजरंगबली की भक्ति में सराबोर नजर आएगा।
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