बरेका में नराकास की छमाही बैठक संपन्न, हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन और तकनीकी नवाचार पर हुआ मंथन
वाराणसी। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के तत्वावधान में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), वाराणसी की छमाही बैठक बुधवार को बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता नराकास के अध्यक्ष एवं बरेका के महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने की। बैठक में नगर के 60 से अधिक केंद्रीय कार्यालयों के प्रमुखों, विभागाध्यक्षों और प्रतिनिधियों ने भाग लेते हुए राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन, तकनीकी नवाचार और कार्यालयी कार्यों में हिंदी के बढ़ते उपयोग पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
बैठक का शुभारंभ महाप्रबंधक आशुतोष पंत के स्वागत और उन्हें स्मृति-चिह्न स्वरूप पुस्तक भेंट कर किया गया। मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं नराकास के उपाध्यक्ष रामजन्म चौबे ने सभी सदस्य कार्यालयों का स्वागत करते हुए प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के व्यवहारिक, सरल और जनोन्मुखी प्रयोग पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन नराकास के सदस्य सचिव एवं बरेका के वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी यथार्थ पाण्डेय ने किया।
महाप्रबंधक ने कहा कि राजभाषा हिंदी केवल कार्यालयी भाषा नहीं, बल्कि प्रशासन और आम जनता के बीच संवाद का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने सदस्य कार्यालयों से आह्वान किया कि वे हिंदी के प्रयोग को और अधिक सरल, प्रभावी तथा तकनीक-सम्मत बनाएं। उन्होंने आधुनिक हिंदी साहित्य के युग-प्रवर्तक भारतेंदु हरिश्चंद्र का स्मरण करते हुए कहा कि "निज भाषा उन्नति अहै" का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है और यह प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के व्यापक उपयोग के लिए प्रेरित करता है।
बैठक के दौरान नराकास, वाराणसी की वार्षिक पत्रिका "बनारस दर्पण" तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-बीएचयू) की राजभाषा पत्रिका "अभ्युदय" का भी लोकार्पण किया गया। इसके अलावा पिछली बैठक की कार्यवृत्त की पुष्टि, लिए गए निर्णयों के अनुपालन की समीक्षा तथा सदस्य कार्यालयों द्वारा प्रस्तुत राजभाषा संबंधी प्रगति रिपोर्ट और आंकड़ों पर विस्तार से चर्चा की गई।
विभिन्न केंद्रीय कार्यालयों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने संस्थानों में हिंदी के प्रचार-प्रसार, डिजिटल माध्यमों के उपयोग, नवाचारों तथा सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों से जुड़े अनुभव साझा किए। बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि आधुनिक तकनीक के साथ हिंदी को जोड़कर प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और जनसुलभ बनाया जा सकता है।
इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक, पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी आशीष जैन ने कहा कि किसी भी संगठन की सफलता का आधार जनता से उसका प्रभावी जुड़ाव होता है और हिंदी इस जुड़ाव का सबसे सशक्त माध्यम है। वहीं गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के सहायक निदेशक (कार्यान्वयन) अजय कुमार चौधरी ने राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी के बढ़ते उपयोग तथा सदस्य कार्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक में बरेका के उप महाप्रबंधक सागर, प्राविधिक प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य सुभाष चंद्र यादव सहित विभिन्न केंद्रीय कार्यालयों के अधिकारी उपस्थित रहे। अंत में वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी एवं नराकास के सदस्य सचिव यथार्थ पाण्डेय ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि बैठक में हुए सार्थक विचार-विमर्श और सुझावों से वाराणसी के केंद्रीय कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को नई गति, नई ऊर्जा और नई दिशा मिलेगी।

