संकटमोचन दरबार में ‘श्री मोहि’ नृत्य नाट्य का भव्य मंचन, कला और भक्ति का अद्भुत संगम
वाराणसी। संकट मोचन मंदिर परिसर में रूपवाणी संस्था द्वारा आयोजित मास्टर्स नृत्य नाट्य ‘श्री मोहि’ का भव्य और सफल मंचन किया गया। इस सांस्कृतिक आयोजन ने दर्शकों को कला और आध्यात्मिकता के अनूठे मेल का अनुभव कराया। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों की सजीव प्रस्तुति, भावपूर्ण अभिनय और आकर्षक नृत्य ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस नृत्य नाट्य का निर्देशन जाने-माने रंगकर्मी व्योमेश शुक्ल ने किया। उनके निर्देशन में प्रस्तुति का हर पक्ष सशक्त और प्रभावशाली नजर आया। मंच संयोजन, दृश्य संरचना और कलाकारों की अभिव्यक्ति में उनकी सूक्ष्म कलात्मक दृष्टि स्पष्ट झलक रही थी। कलाकारों ने पारंपरिक भारतीय नृत्य शैलियों को आधुनिक अभिव्यक्ति के साथ जोड़ते हुए कथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, जिससे दर्शक शुरुआत से अंत तक प्रस्तुति से जुड़े रहे।

कार्यक्रम की विशेषता केवल नृत्य और अभिनय तक सीमित नहीं रही, बल्कि संगीत, प्रकाश व्यवस्था और मंच सज्जा ने भी पूरे आयोजन को भव्यता प्रदान की। हर दृश्य में भावनाओं का गहरा प्रभाव देखने को मिला, जिसे कलाकारों ने अपनी सटीक तालमेल और समर्पण से और अधिक प्रभावी बना दिया। दर्शकों ने प्रस्तुति के दौरान कई बार तालियों की गूंज से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, कला प्रेमी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे एक यादगार सांस्कृतिक आयोजन बताया। आयोजन ने यह सिद्ध किया कि वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत आज भी उतनी ही समृद्ध और जीवंत है।
कार्यक्रम के समापन पर रूपवाणी संस्था की ओर से सभी कलाकारों, सहयोगियों और आयोजकों को सम्मानित किया गया। संस्था के पदाधिकारियों ने भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया, ताकि कला और संस्कृति को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।

