दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना की धीमी रफ्तार पर शासन नाराज, अफसरों को लगी फटकार, बरसात से पहले 187 मकानों पर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश
वाराणसी। दालमंडी में सड़क चौड़ीकरण के लिए चिह्नित किए गए भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी है। हालांकि परियोजना की धीमी प्रगति से शासन नाराज है। इसको लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि हर हाल में बरसात से पहले चिह्नित किए गए सभी 187 भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी की जाए।
अब तक दालमंडी क्षेत्र में चौड़ीकरण परियोजना का 50 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हो सका है, जिससे शासन स्तर पर नाराजगी है। इसको देखते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

बरसात से पहले पूरी करनी होगी कार्रवाई, मुआवजा वितरण पर भी जोर
शासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि बरसात शुरू होने से पहले सभी 187 मकानों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी कर ली जाए। साथ ही, मकान मालिकों से जल्द से जल्द उनके मकानों की रजिस्ट्री कराकर मुआवजा वितरण की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी करने को कहा गया है।
बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में 22 जून के आसपास मानसून के आगमन की संभावना जताई गई है। ऐसे में बारिश शुरू होने से पहले परियोजना का मुख्य कार्य पूरा करना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।
650 मीटर सड़क का होगा चौड़ीकरण, करोड़ों की लागत से चल रही परियोजना
दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना के तहत नई सड़क से चौक तक लगभग 650 मीटर लंबी सड़क को चौड़ा किया जाना है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 215.59 करोड़ रुपये तय की गई है। परियोजना के तहत कुल 187 मकानों का ध्वस्तीकरण किया जाना है, ताकि क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाया जा सके और भीड़भाड़ की समस्या से राहत मिल सके।
तीन विभागों की संयुक्त टीम कर रही कार्य, अब तक 47 मकानों की रजिस्ट्री
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने के लिए PWD, नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम लगातार कार्य कर रही है। अब तक 47 मकानों की रजिस्ट्री कराई जा चुकी है और करीब 33 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में भवन स्वामियों को वितरित किए जा चुके हैं। सड़क चौड़ीकरण के साथ-साथ दालमंडी क्षेत्र में सड़क, नाली, सीवर और बिजली से संबंधित बुनियादी ढांचे का भी विकास किया जाएगा, जिससे इलाके की समग्र व्यवस्था में सुधार आने की उम्मीद है।
धीमी प्रगति से बढ़ी प्रशासनिक चिंता
परियोजना को लेकर लगातार कार्रवाई जारी है, लेकिन कार्य की धीमी गति ने प्रशासन और शासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। अब अधिकारियों पर समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने का दबाव साफ तौर पर देखा जा रहा है, ताकि मानसून से पहले इस महत्वपूर्ण परियोजना को अंतिम रूप दिया जा सके।

