गूगल से सीखी मूर्तिकला, बनाई मां दुर्गा की आंखें खोलने और बंद करने वाली अनूठी प्रतिमा 

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छित्तूपुर के श्रेयांश और किशन की अद्भुत कला, पुआल से बने मंदिर में विराजमान हैं मां की भव्य प्रतिमा 

मनोज तिवारी के भोजपुरी गीत से मिली जीवंत प्रतिमा बनाने की प्रेरणा, पिता बेचते हैं पानीपुरी

पढ़ाई के साथ भक्ति और हुनर की मिसाल पेश कर रहे दोनों किशोर, आठ वर्षों से जेब खर्च जोड़कर बना रहे देवी-देवताओं की प्रतिमाएं

एक प्रतिमा तैयार करने में खर्च होते हैं 20 से 25 हजार रुपये, मां दुर्गा के साथ गणेश, कार्तिकेय, लक्ष्मी और सरस्वती की भी प्रतिमाएं बनाई

वाराणसी। हुनर सीखने के लिए बड़े संस्थान और महंगे प्रशिक्षण जरूरी नहीं, बल्कि लगन और सीखने की ललक हो तो इंटरनेट भी गुरु बन सकता है। छित्तूपुर के श्रेयांश विश्वकर्मा और किशन विश्वकर्मा ने अपनी मेहनत से इसे साबित कर दिखाया है। दोनों किशोर पिछले आठ वर्षों से अपने जेब खर्च के पैसे जोड़कर मां दुर्गा समेत विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बना रहे हैं। इस बार उन्होंने मां दुर्गा की ऐसी अनूठी प्रतिमा तैयार की है, जिसकी आंखें अपने आप खुलती और बंद होती हैं। पुआल से बने मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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पढ़ाई के साथ मूर्तिकला का जुनून
श्रेयांश कक्षा 12 और किशन कक्षा 10 के छात्र हैं। पढ़ाई के साथ दोनों ने मूर्तिकला को अपना शौक और साधना बना लिया है। खास बात यह है कि उन्होंने किसी संस्थान में प्रशिक्षण नहीं लिया, बल्कि गूगल और इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के माध्यम से मूर्ति बनाने की बारीकियां सीखीं। लगातार अभ्यास से उन्होंने अपनी कला को निखारा और अब आकर्षक प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। दोनों अपने सालभर के जेब खर्च को इकट्ठा कर प्रतिमाएं बनाने में लगाते हैं। एक बार में प्रतिमाएं तैयार करने पर करीब 20 से 25 हजार रुपये खर्च होते हैं। इस वर्ष मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा बनाने और उसे सजाने में उन्हें लगभग एक महीने का समय लगा।

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भोजपुरी गीत से आया अनूठा विचार
मां दुर्गा की प्रतिमा की सबसे बड़ी विशेषता उसकी आंखों का अपने आप खुलना और बंद होना है। श्रेयांश के मुताबिक, प्रसिद्ध भोजपुरी गायक मनोज तिवारी के गीत ‘लागे माटी के मुरतिया बोल देही’ से उन्हें ऐसी प्रतिमा बनाने की प्रेरणा मिली, जो देखने में जीवंत प्रतीत हो। इसी विचार को साकार करने के लिए दोनों ने मां दुर्गा की आंखों को विशेष तरीके से तैयार किया।

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प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर स्वागत करतीं दो देवी स्वरूप आकृतियां भी बनाई गई हैं। इसके अलावा भगवान गणेश, कार्तिकेय, देवी लक्ष्मी और सरस्वती के साथ उनके वाहनों मूषक, सिंह, उल्लू और मयूर की प्रतिमाएं भी तैयार की गई हैं। इन सभी को छित्तूपुर की बड़ी महारानी श्री नवरात्रि पूजन उत्सव में पुआल से बने मंदिर में स्थापित किया गया है।

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पिता बेचते हैं पानीपुरी, बच्चों ने मेहनत से संवारा हुनर
श्रेयांश के पिता पानीपुरी बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद दोनों किशोरों ने अपने शौक और कला को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रखा। परिवार ने भी उनका हौसला बढ़ाया। बच्चों ने करीब आठ साल पहले प्रतिमाएं बनाना शुरू किया था। धीरे-धीरे यह पहल नवरात्र के दौरान घर में देवी-देवताओं की स्थापना और नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने की परंपरा बन गई। आयोजकों के अनुसार, नवरात्र के पहले दिन प्रतिमाओं की स्थापना होती है। नवमी पर विशेष पूजा के साथ विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। दसवें दिन मां की विदाई होती है, जिसमें श्रद्धालु शामिल होकर सिंदूर खेलते हैं।

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त्योहारों पर निशुल्क प्रतिमाएं बनाकर करते हैं सहयोग
श्रेयांश और किशन अपनी कला को केवल निजी पूजा तक सीमित नहीं रखते। क्षेत्र में त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान लोग उनसे प्रतिमाएं बनाने का आग्रह करते हैं, तो दोनों अपनी ओर से सहयोग करते हैं। वे मां काली, मां दुर्गा, भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी सहित विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं निशुल्क बनाकर देते हैं। इसके बदले वे कोई शुल्क नहीं लेते।

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हुनर के साथ सेवा और आस्था का संदेश
श्रेयांश और किशन की कहानी आर्थिक सीमाओं के बीच अपनी प्रतिभा को निखारने और उसे समाज के लिए उपयोगी बनाने की प्रेरणा देती है। एक ओर दोनों अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर मूर्तिकला के माध्यम से धार्मिक आयोजनों को खास बना रहे हैं। गूगल से सीखे हुनर, जेब खर्च से तैयार प्रतिमाओं और निशुल्क सेवा के जरिए दोनों किशोरों ने साबित किया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती।

BK Pathak
BK Pathak

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Beerkeshwar Pathak Journalist Beerkeshwar Pathak, who entered the field of journalism in 2015, has nearly a decade of experience in print and digital media. He holds a postgraduate diploma in journalism and has established his reputation through reporting at prestigious media outlets like Amar Ujala, Hindustan, and Dainik Jagran. He has a special interest and expertise in reporting on political and social issues, news analysis, and editing, along with eventful news. He currently serves as an editor at Live VNS, a leading digital news platform in Varanasi. In this role, he is contributing to reshaping digital journalism and delivering important information to readers through factual and reliable news. Factual investigation of news and effective editing are key aspects of his journalism.

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