काशी विश्वनाथ धाम से शक्तिपीठ विशालाक्षी को भेजा गया माँ गौरी का श्रृंगार, नवरात्र में अनूठी परंपरा

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वाराणसी। चैत्र नवरात्र के सप्तमी दिवस पर काशी में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्री विश्वेश्वर का अवलोकन कराकर माँ गौरी के लिए वस्त्र एवं श्रृंगार सामग्री विधिपूर्वक शक्तिपीठ माता विशालाक्षी को अर्पित की गई। यह विशेष आयोजन सनातन परंपराओं और गहरी श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ, जो काशी की धार्मिक विरासत को दर्शाता है।

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विश्वनाथ धाम से माँ विशालाक्षी तक श्रृंगार अर्पण
नवरात्र के इस पावन अवसर पर मंदिर के शास्त्रियों द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद माँ गौरी के धारण हेतु वस्त्र और श्रृंगार सामग्री को पहले श्री विश्वेश्वर को अवलोकित कराया गया। इसके पश्चात इसे उपहार स्वरूप शक्तिपीठ माता विशालाक्षी मंदिर में अर्पित किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में धार्मिक नियमों और परंपराओं का विशेष ध्यान रखा गया।

परंपरा और आस्था का अनूठा संगम
यह आयोजन केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि काशी की प्राचीन परंपराओं का जीवंत उदाहरण है। मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ से अवलोकित कराए गए वस्त्र-श्रृंगार को माँ के चरणों में अर्पित करने से विशेष पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्रद्धालुओं के लिए यह दृश्य अत्यंत आस्था और विश्वास से भरा हुआ रहा।

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नवरात्र भर जारी रहेगा विशेष क्रम
मंदिर प्रशासन के अनुसार नवरात्र के आगामी दिनों में भी माँ गौरी के विभिन्न स्वरूपों के अनुसार प्रतिदिन उनके लिए वस्त्र और श्रृंगार सामग्री तैयार की जाएगी। हर दिन उस स्वरूप को समर्पित सामग्री को पहले श्री विश्वेश्वर को अवलोकित कराया जाएगा और फिर उपहार के रूप में अर्पित किया जाएगा।

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काशी की आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक
यह परंपरा काशी की आध्यात्मिक पहचान और सनातन संस्कृति की गहराई को दर्शाती है। नवरात्र के दौरान इस प्रकार के आयोजनों से पूरे शहर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है और श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन-पूजन कर रहे हैं।

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