जीआई टैग से बनारस के लौंगलता को मिली नई पहचान, डिमांड के साथ बढ़े रोजगार के अवसर 

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) और जीआई टैग पहल का सकारात्मक प्रभाव अब बनारस की पारंपरिक मिठाई लौंगलता के कारोबार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। जीआई टैग मिलने के बाद इस पारंपरिक मिठाई को नई पहचान मिली है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों में भी इजाफा हुआ है।

लौंगलता व्यवसाय से जुड़े अमोद कुमार सिंह ने बताया कि सरकार की पहल से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि ओडीओपी योजना के तहत प्रत्येक जिले की पारंपरिक और विशिष्ट पहचान को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें वाराणसी की प्रसिद्ध लौंगलता भी शामिल है। इससे छोटे व्यापारियों और कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है।

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उन्होंने बताया कि प्रशासन समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर और गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम आयोजित करता है, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता और पैकेजिंग में निरंतर सुधार हो रहा है। एक उत्कृष्ट गुणवत्ता की लौंगलता तैयार करने में लगभग सात से आठ कारीगरों की मेहनत लगती है। वर्तमान में उनकी दुकान पर प्रतिदिन करीब 100 से 150 किलोग्राम लौंगलता की बिक्री हो रही है, जिससे कई परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है।

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अमोद कुमार सिंह ने कहा कि सरकार की योजनाओं ने छोटे कारोबारियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। उनका मानना है कि जीआई टैग और ओडीओपी जैसी पहल से बनारस की पारंपरिक मिठाइयों को नई पहचान मिली है, जिससे कारोबार में लगातार वृद्धि हो रही है और स्थानीय कारीगरों को स्थायी रोजगार भी मिल रहा है।

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