वाराणसी में खतरे के निशान के करीब गंगा, कानपुर बैराज से छोड़ा गया 6 लाख क्यूसेक पानी, तीन दिन में पहुंचेगा बनारस 

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24 घंटे में 28 सेंटीमीटर बढ़ा गंगा का जलस्तर, राजघाट पर 70.56 मीटर पहुंचा जलस्तर, खतरे के निशान से करीब 70 सेंटीमीटर नीचे, निचले इलाकों की ओर बढ़ रहा पानी

अस्सी घाट का मंच पांच फीट पानी में डूबा, प्रवेश पर रोक, सामनेघाट, नगवा और गंगोत्री बिहार कॉलोनी में बढ़ी परेशानी

वरुणा का पानी हिदायत नगर और तालीमन नगर के घरों तक पहुंचा, राहत शिविरों में बढ़ी प्रभावित परिवारों की संख्या

वाराणसी। गंगा और वरुणा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने वाराणसी में एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के राजघाट गेज स्टेशन पर गुरुवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 70.56 मीटर दर्ज किया गया। यह चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर से करीब 29.8 सेंटीमीटर ऊपर है। नदी का जलस्तर लगातार करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटे में करीब 28 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। गंगा का खतरे का निशान 71.262 मीटर है और मौजूदा जलस्तर इससे करीब 70 सेंटीमीटर नीचे है।

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गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ तटवर्ती और निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है। गुरुवार सुबह आठ बजे तक वाराणसी में 28.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश और नदी के बढ़ते पानी के कारण घाटों पर गतिविधियां प्रभावित होने लगी हैं। बुधवार शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 70.42 मीटर था, जिसके बाद भी पानी लगातार बढ़ता रहा।

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अस्सी घाट पर मंच डूबा, प्रवेश बंद
गंगा का पानी अस्सी घाट क्षेत्र में लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है। सुबह-ए-बनारस का मंच करीब पांच फीट पानी में डूब चुका है। सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर लोगों का प्रवेश बंद कर दिया है। पुराने अस्सी घाट की ओर भी पानी सड़क की तरफ बढ़ रहा है।

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अस्सी घाट, रविदास घाट और तुलसी घाट पर स्नान प्रतिबंधित किए जाने के बाद बाहर से आए कई श्रद्धालु सामनेघाट के नए पक्के घाट की ओर पहुंच रहे हैं। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए घाटों पर आवाजाही और नदी किनारे होने वाली गतिविधियों में लगातार कमी आ रही है।
 

नगवा में दर्जनभर परिवारों पर विस्थापन का खतरा
नगवा नाले के आसपास भी पानी लगातार बढ़ रहा है। नगवा रामेश्वर मठ के पीछे जाने वाले रास्ते तक जलस्तर पहुंचने लगा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यदि पानी इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो नगवा सोनकर बस्ती और हरिजन बस्ती के करीब दर्जनभर परिवारों को राहत शिविर में भेजने की नौबत आ सकती है।

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गंगोत्री बिहार कॉलोनी की लेन नंबर एक के नीचे तक गंगा का पानी पहुंच गया है। वहीं सामनेघाट में अघोर आश्रम के आसपास के निचले हिस्सों में पानी भर गया है। सामनेघाट तिराहे से पीएसी कैंप की तरफ जाने वाले मार्ग पर भी पानी लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है।

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सामनेघाट में बारादरी और घाट जलमग्न
सामनेघाट जज गेस्ट हाउस और नए पक्के घाट के सामने बनी बारादरी पूरी तरह पानी में डूब गई है। गढ़वाघाट आश्रम के सामने पक्के घाट की मढ़ी भी जलमग्न हो चुकी है। इससे घाटों पर होने वाली धार्मिक और अन्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। नदी किनारे रहने वाले लोग लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।

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ज्ञान प्रवाह नाले का चैनल गेट बंद
गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ज्ञान प्रवाह नाला भी पानी से भर गया है। पानी को कॉलोनियों की ओर जाने से रोकने के लिए चैनल गेट बंद कर दिया गया है। कॉलोनियों की तरफ जमा हो रहे पानी को मोटर पंप के जरिये बाहर निकालने की व्यवस्था की गई है। स्थानीय स्तर पर स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।

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वरुणा का पानी घरों तक पहुंचा
गंगा के साथ ही वरुणा नदी का बढ़ता जलस्तर भी तटवर्ती क्षेत्रों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। हिदायत नगर और तालीमन नगर में कई घरों में बाढ़ का पानी पहुंचने की सूचना है। नक्खी घाट और दीनदयालपुर में बनाए गए राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों की संख्या भी बढ़ रही है। वरुणा की बाढ़ का असर ग्रामीण इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। बेदौली, कोटवा और टड़िया के नदी किनारे के क्षेत्रों में किसानों की फसल पानी में डूब गई है। खेतों में खड़ी फसल को नुकसान की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

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रमना में सब्जियों की फसल में घुसा पानी
रमना गांव में गंगा किनारे किसानों की ओर से तैयार की गई सब्जियों की फसल में भी पानी घुसने लगा है। किसानों का कहना है कि जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी रही तो खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह जलमग्न हो सकती है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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अस्सी से डोमरी तक बढ़ रहा पानी
गंगा का बढ़ता पानी अब अस्सी से सामनेघाट और डोमरी तक निचले इलाकों और आबादी की ओर बढ़ रहा है। घाटों पर पानी चढ़ने के साथ आसपास की गलियों, रास्तों और निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। तटवर्ती परिवार नदी के जलस्तर में हो रही हर वृद्धि पर नजर रख रहे हैं।

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कानपुर बैराज से छोड़ा गया पानी बढ़ा सकता है दबाव
स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि पिछले 12 घंटे में कानपुर बैराज से करीब छह लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस पानी को वाराणसी पहुंचने में करीब तीन दिन लग सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में गंगा के जलस्तर पर इसका असर पड़ने की आशंका है।

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खतरे के निशान से नीचे, बढ़ते पानी से बढ़ी चिंता
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार वाराणसी में गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर, खतरे का स्तर 71.262 मीटर और उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) 73.901 मीटर है। गुरुवार सुबह नदी का जलस्तर 70.56 मीटर पहुंच गया। यानी गंगा चेतावनी बिंदु पार कर चुकी है और लगातार बढ़ रही है। लगातार बारिश, 24 घंटे में करीब 28 सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ने और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी को देखते हुए तटवर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ाना जरूरी हो गया है। राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों की संख्या बढ़ने के साथ निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनती जा रही है। फिलहाल गंगा और वरुणा के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।

तस्वीरें ......

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