वाराणसी में चेतावनी बिंदु के करीब गंगा, एक मीटर नीचे जलस्तर, घाट डूबे, तटवर्ती इलाकों में बढ़ी चिंता
वाराणसी। काशी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के राजघाट, वाराणसी गेज स्थल पर शनिवार को सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 69.17 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और पानी करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। इससे गंगा के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरे का स्तर 71.262 मीटर निर्धारित है। वर्तमान जलस्तर 69.17 मीटर है, यानी गंगा का पानी चेतावनी बिंदु से करीब 1.09 मीटर और खतरे के निशान से 2.09 मीटर नीचे है। वहीं अब तक का उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) 73.901 मीटर दर्ज है।

लगातार बढ़ रहा पानी, घाटों पर बढ़ी परेशानी
गंगा के जलस्तर में वृद्धि का असर वाराणसी के घाटों पर साफ दिखाई दे रहा है। पानी लगातार सीढ़ियों की ओर बढ़ रहा है। निचले हिस्से में स्थित घाटों पर जलभराव बढ़ने के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। कई घाटों का संपर्क पहले ही टूट चुका है और जलस्तर बढ़ने के साथ स्थिति और चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।

गंगा किनारे होने वाली नियमित गतिविधियों पर भी बाढ़ का असर पड़ रहा है। घाटों पर दुकान लगाने वाले दुकानदारों और नाविकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। जलस्तर बढ़ने के कारण उन्हें अपना सामान और दुकानें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

तटवर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ी
गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण तटवर्ती और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जिन क्षेत्रों में पहले से पानी पहुंच चुका है, वहां लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए लोगों में लगातार चिंता बनी हुई है। प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। गंगा के जलस्तर में वृद्धि की गति और आने वाले घंटों के रुझान पर विशेष निगाह रखी जा रही है। यदि जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो चेतावनी बिंदु की दूरी धीरे-धीरे कम होती जाएगी।

किसानों की भी बढ़ी चिंता
गंगा के साथ ही वरुणा नदी और अन्य जलस्रोतों के आसपास के क्षेत्रों में भी जलस्तर बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। तटीय क्षेत्रों में खेतों तक पानी पहुंचने का खतरा बना हुआ है। धान, मक्का और सब्जियों समेत खरीफ की फसलों पर बाढ़ का असर पड़ने की आशंका है। किसानों का कहना है कि यदि पानी खेतों में लंबे समय तक जमा रहा तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में जलस्तर बढ़ने की रफ्तार कम होने और पानी जल्द स्थिर होने की उम्मीद की जा रही है।

खतरे के निशान से अभी नीचे, लेकिन लगातार बढ़ोतरी चिंता का कारण
फिलहाल गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ोतरी चिंता का कारण बनी हुई है। 69.17 मीटर के मौजूदा जलस्तर और एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की वृद्धि के बीच प्रशासन के साथ-साथ तटवर्ती आबादी को भी सतर्क रहने की जरूरत है। गंगा के जलस्तर में अगले कुछ घंटों में क्या बदलाव होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। चेतावनी स्तर पार होने की स्थिति में निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है।








