फर्जी आर्मी अफसर बनकर 15 लाख की ठगी, STF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी गिरफ्तार, सेना, रेलवे और शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से वसूले लाखों रुपये

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वाराणसी। फर्जी आर्मी अफसर बनकर युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) वाराणसी यूनिट और भेलूपुर थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी को दबोचा गया।

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खुद को कमांडिंग अफसर बताकर करता था ठगी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी धर्मेंद्र कुमार पांडेय खुद को सेना का कमांडिंग अफसर बताकर लोगों को अपने झांसे में लेता था। वह सेना, रेलवे और शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर युवाओं से मोटी रकम वसूलता था।

जांच में सामने आया कि आरोपी ने किसी से 5 लाख तो किसी से 10 लाख रुपये तक लिए, जबकि कई अन्य लोगों से 1 से 2 लाख रुपये ऐंठे गए। कुल मिलाकर अब तक करीब 15 लाख रुपये से अधिक की ठगी का मामला सामने आया है।

चंदौली का रहने वाला, वाराणसी में बना ठिकाना
आरोपी मूल रूप से चंदौली जनपद के अलीनगर थाना क्षेत्र के कैली गांव का निवासी है। वह फिलहाल वाराणसी के भेलूपुर थाना क्षेत्र स्थित बृज एंक्लेव कॉलोनी में रह रहा था और वहीं से अपने ठगी के नेटवर्क को संचालित कर रहा था।

सेना के इनपुट पर STF हुई सक्रिय
इस मामले में सेना से मिले इनपुट के आधार पर STF ने जांच शुरू की। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद STF और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आरोपी को भेलूपुर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं।

फर्जी दस्तावेजों का जाल, कई सामान बरामद
पुलिस ने आरोपी के पास से कई फर्जी दस्तावेज और संदिग्ध सामग्री बरामद की है। इनमें मोबाइल फोन, रक्षा मंत्रालय के फर्जी आईडी कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, डेबिट कार्ड, अंक पत्र और अन्य शैक्षिक प्रमाण पत्र शामिल हैं।

इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर आरोपी लोगों का भरोसा जीतता था और उन्हें नौकरी दिलाने का झांसा देता था।

अन्य पीड़ितों की तलाश जारी
पुलिस अब इस मामले में अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान कर रही है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है।

यह मामला एक बार फिर सावधान करता है कि नौकरी के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूरी है।

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