काशी में संस्कृति का उत्सव, 28 से 31 अगस्त तक होगा चार दिवसीय 'काशी तेलुगु संगमम्'
वाराणसी। काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को दक्षिण भारत की समृद्ध तेलुगु परंपरा से जोड़ने के उद्देश्य से आदिलीला फाउंडेशन की ओर से 28 से 31 अगस्त तक चार दिवसीय 'काशी तेलुगु संगमम्' का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव में देशभर से 2,000 से अधिक प्रतिनिधि, साहित्यकार, कलाकार, शिक्षाविद और सांस्कृतिक हस्तियां भाग लेंगी। आयोजन भारतीय भाषाओं, साहित्य, कला, संगीत, नृत्य और लोक परंपराओं के विराट संगम का साक्षी बनेगा।
सिकरौल स्थित आदिलीला फाउंडेशन के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. वकुलाभरणम् कृष्ण मोहन राव, फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. एस. आदिनारायण तथा हृदयनारायण पांडेय ने आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि काशी तेलुगु संगमम् प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'राष्ट्र प्रथम' के मंत्र तथा 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के संकल्प से प्रेरित एक राष्ट्रीय सांस्कृतिक अभियान है।
उन्होंने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक, साहित्यिक और भावनात्मक संबंधों को और अधिक सशक्त बनाना है। साथ ही काशी की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा तथा तेलुगु समाज की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के बीच संवाद और समन्वय को नई दिशा देना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।
चार दिवसीय संगम में देश की विभिन्न भारतीय भाषाओं के प्रख्यात साहित्यकार, कवि, लेखक, चिंतक, शोधकर्ता और सांस्कृतिक विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। इसके अलावा भारतीय शास्त्रीय एवं लोक कला की विविध रंगत भी मंच पर देखने को मिलेगी। प्रसिद्ध गुरु एवं कलाकार कुचिपुड़ी, भरतनाट्यम सहित अन्य शास्त्रीय नृत्य शैलियों की प्रस्तुति देंगे, जबकि विभिन्न राज्यों के लोक कलाकार अपनी पारंपरिक लोकनृत्य एवं लोककला के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन करेंगे।
आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम का संचालन पूर्व निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार किया जाएगा तथा विस्तृत कार्यक्रम शीघ्र ही सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने देशभर के साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों, सांस्कृतिक संस्थाओं और समाज के सभी वर्गों से इस राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव में सहभागिता कर भारतीय सांस्कृतिक एकता के इस महाअभियान को सफल बनाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि काशी तेलुगु संगमम् राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समन्वय और भारतीय परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

