रंगभरी एकादशी पर ब्रज के रसियारों का होगा काशी आगमन, पहली बार काशी में ‘रास’ और फूलों की होगी होली
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ धाम और मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मस्थान के मध्य सांस्कृतिक आदान-प्रदान की नई पहल शुरू हुई है। काशी से प्रेषित उपहारों को आज श्री कृष्ण जन्मस्थान न्यास द्वारा विधिवत प्राप्त किया गया। वहां से प्राप्त चित्र और वीडियो अत्यंत भावपूर्ण एवं चित्ताकर्षक बताए गए हैं। इस पहल को ब्रज और काशी की परंपराओं के ऐतिहासिक संगम के रूप में देखा जा रहा है।

विश्वनाथ धाम की ओर से श्रीकृष्ण को उपहार
रंगभरी एकादशी के पावन अवसर पर भगवान विश्वनाथ की ओर से भगवान श्रीकृष्ण के बाल गोपाल स्वरूप के लिए खिलौने, चॉकलेट, मिठाइयाँ, वस्त्र एवं फल उपहार स्वरूप मथुरा भेजे गए। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने इस नवाचार को उत्साहपूर्वक स्वीकार करने के लिए श्री कृष्ण जन्मस्थान न्यास और उसके सचिव आदरणीय कपिल शर्मा जी के प्रति आभार व्यक्त किया है।

26 फरवरी को मथुरा से काशी आएगी भेंट सामग्री
मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मस्थान न्यास के सचिव कपिल शर्मा जी ने जानकारी दी कि 26 फरवरी को मथुरा से भेंट सामग्री के साथ ‘रसियारों’ की एक विशेष टोली काशी के लिए प्रस्थान करेगी। यह टोली ब्रज की सांस्कृतिक परंपरा को काशी में प्रस्तुत करेगी।
27 फरवरी को काशी में ‘रास’ और फूलों की होली
27 फरवरी 2026 को रंगभरी एकादशी के अवसर पर काशी में ‘शिवार्चनम मंच’ से पहली बार ब्रज के रसियारों द्वारा ‘रास’ और ‘फूलों की होली’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन ब्रज और काशी की सांस्कृतिक एकता का अद्भुत उदाहरण बनेगा।

ब्रज में इस अवसर पर लठमार होली का विशेष महत्व है, वहीं काशी में रंगभरी एकादशी बाबा विश्वनाथ और मां गौरा के गौना उत्सव के रूप में मनाई जाती है। ऐसे में दोनों परंपराओं का संगम भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।

श्रद्धालुओं से सहभागिता की अपील
मंदिर प्रशासन ने समस्त श्रद्धालुओं और काशीवासियों से आग्रह किया है कि वे इस पावन उत्सव में सहभागी बनें, आयोजन का आनंद लें और पुण्य लाभ प्राप्त करें।
यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि काशी और ब्रज की ऐतिहासिक परंपराओं को एक सूत्र में पिरोने का कार्य भी करेगा।

