भगवान सुपार्श्वनाथ जन्म एवं तप कल्याणक पर उमड़े अनुयायी, 108 कलश जल से हुआ अभिषेक, विश्व शांति की प्रार्थना

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वाराणसी। जैन धर्म के सप्तम तीर्थंकर 1008 भगवान सुपार्श्वनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव शुक्रवार को उनकी जन्मस्थली भदैनी स्थित दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र, प्रभुदास जैन घाट पर श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी के पावन अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में वाराणसी सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान सुपार्श्वनाथ की आराधना की और विश्व शांति एवं मानव कल्याण की कामना की।

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प्रातः 6:30 बजे मंगलाचरण के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। इसके बाद भगवान सुपार्श्वनाथ की प्रतिमा को भव्य रूप से सुसज्जित चांदी के रथ पर विराजमान कर शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर, भेलूपुर से प्रारंभ होकर सुपार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, छेदीलाल जैन ट्रस्ट पहुंची, जहां भगवान का शांतिधारा एवं विधिवत अभिषेक संपन्न हुआ।

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इसके उपरांत भगवान की प्रतिमा को चांदी की पालकी में विराजमान कर श्रद्धालु भजन-कीर्तन, मंगलगान और जयघोष के बीच भदैनी स्थित भगवान सुपार्श्वनाथ की जन्मस्थली पहुंचे। यहां श्रद्धालुओं ने 108 कलशों से भगवान का जलाभिषेक कर पुण्य अर्जित किया। पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष अनुभव हुआ।

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महोत्सव के दौरान देश और दुनिया में बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं, अग्निकांड, प्राकृतिक आपदाओं तथा जन-धन की हानि को देखते हुए विशेष वृहद शांतिधारा का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान सुपार्श्वनाथ से प्रार्थना की कि समस्त विश्व, विशेषकर भारत में शांति, समृद्धि और सुख-शांति बनी रहे तथा सभी प्रकार की आपदाओं का निवारण हो।

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धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला में भगवान सुपार्श्वनाथ की पंचकल्याणक पूजा, देव-शास्त्र-गुरु पूजन, चौबीसी पूजा तथा भगवान सुपार्श्वनाथ एवं चंद्रप्रभु विधान सहित अनेक धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने पूरे दिन पूजा-अर्चना, भक्ति और ध्यान के माध्यम से धर्मलाभ अर्जित किया।

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आयोजकों ने बताया कि भगवान सुपार्श्वनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव केवल जैन समाज का धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को अहिंसा, संयम, करुणा और शांति का संदेश देने वाला प्रेरणादायी अवसर है। उन्होंने कहा कि भगवान के आदर्श आज भी समाज को सद्भाव, आत्मसंयम और विश्व कल्याण की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

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इस अवसर पर प्रो. फूलचंद प्रेमी जैन, प्रो. कमलेश कुमार जैन, प्रो. अशोक जैन, विशाल जैन, पारस जैन, अनिकेत जैन, सुरेंद्र कुमार जैन, रंजन कुमार जैन, सिद्धार्थ जैन, सौरभ जैन, पुष्पा जैन, क्रांति जैन, रत्ना जैन, प्रमिला सांवरिया, बीना जैन, रजनी जैन, स्नेहलता जैन, आरती जैन, मंजू जैन, मनोरमा जैन, स्मृति जैन, विनीता अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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