काशी प्रांत में संघ का विस्तार तेज, शताब्दी वर्ष में 116 नई शाखाएं, समाज परिवर्तन के लिए व्यापक अभियान

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वाराणसी। आरएसएस के शताब्दी वर्ष में काशी प्रांत में संगठन विस्तार और सामाजिक गतिविधियों को लेकर उल्लेखनीय प्रगति सामने आई है। संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, वैचारिक स्पष्टता, अनुशासित कार्यपद्धति और समाज के साथ बेहतर समन्वय के चलते संगठन तेजी से घर-घर तक पहुंच बना रहा है।

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लंका स्थित विश्व संवाद केन्द्र काशी में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रांत कार्यवाह मुरली पाल और प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. मुरार त्रिपाठी ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि शताब्दी वर्ष में काशी प्रांत में 116 नई शाखाएं बढ़ी हैं। इस प्रकार शाखाओं की कुल संख्या 2851 से बढ़कर 2967 हो गई है। वहीं देशभर में शाखाओं की संख्या में लगभग 6000 की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे कुल शाखाएं करीब 88,989 तक पहुंच गई हैं।

प्रांत कार्यवाह ने बताया कि संघ की गतिविधियां समाज की “सज्जन शक्ति, सुप्त शक्ति और उत्सुक शक्ति” को जोड़कर जागरण अभियान को गति दे रही हैं। उन्होंने कहा कि “पंच परिवर्तन” को जीवन में अपनाने से सामाजिक व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव संभव है। काशी प्रांत के सभी 155 खंडों और 115 नगरों में संघ कार्य सक्रिय है। 1504 न्याय पंचायतों में से 1438 में शाखाएं संचालित हैं, जबकि शेष स्थानों पर मिलन कार्यक्रम हो रहे हैं।

प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि शताब्दी वर्ष के दौरान काशी प्रांत में 2102 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। घर-घर संपर्क अभियान के तहत स्वयंसेवकों ने 31 लाख 98 हजार 841 घरों तक पहुंच बनाई। इस दौरान 2 लाख से अधिक संघ साहित्य की बिक्री हुई और 31 लाख से ज्यादा पत्रक वितरित किए गए। अभियान के लिए 16,512 टोलियां गठित की गईं। युवा कार्यक्रमों के तहत 27 जिलों के 269 स्थानों पर 560 सम्मेलन आयोजित हुए, जिनमें 53,032 विद्यार्थी और 20,342 युवा व्यवसायी शामिल हुए। इसके अलावा 240 स्थानों पर आयोजित सद्भाव बैठकों में 16,459 लोगों की भागीदारी रही।

पदाधिकारियों ने बताया कि आगामी वर्ष संत शिरोमणि संत रविदास के 650वें प्राकट्य वर्ष को विशेष रूप से मनाया जाएगा। इसके लिए अखिल भारतीय स्तर पर कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव प्रस्तावित है। वर्ष 2027 से देश में 46 प्रांतों के स्थान पर 85 सम्भाग बनाए जाएंगे। इसी क्रम में काशी प्रांत को दो भागों काशी और प्रयागराज में विभाजित किया जाएगा। संघ के अनुसार, इन सभी प्रयासों का उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना और विभिन्न वर्गों के बीच समन्वय को मजबूत करना है।

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