काशी के गंगा घाटों से लौटने लगे विदेशी परिंदे, साइबेरियन पक्षियों की विदाई शुरू
वाराणसी। काशी की सर्दियों की पहचान बन चुके सात समंदर पार से आने वाले साइबेरियन पक्षी अब अपने वतन की ओर लौटने लगे हैं। तापमान में धीरे-धीरे हो रही बढ़ोतरी के साथ गंगा घाटों और आसपास के जलाशयों में इन विदेशी मेहमानों की संख्या कम दिखाई देने लगी है। कुछ दिन पहले तक घाटों पर इनका कलरव और झुंडों की उड़ान आकर्षण का केंद्र था, लेकिन अब उनकी विदाई का समय आ गया है।

हर वर्ष शीतकाल में साइबेरिया और अन्य अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों से हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर ये प्रवासी पक्षी वाराणसी पहुंचते हैं। लंबी उड़ान के बावजूद इनका मार्ग लगभग निश्चित होता है। मौसम अनुकूल मिलते ही ये उसी रास्ते से वापसी भी करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन पक्षियों की दिशा पहचानने की क्षमता अद्भुत होती है, जिससे वे कभी रास्ता नहीं भटकते।

जानकार बताते हैं कि साइबेरियन पक्षियों को न तो अत्यधिक ठंड रास आती है और न ही तेज गर्मी। इन्हें मध्यम और हल्की ठंड वाला वातावरण पसंद होता है। यही कारण है कि दिसंबर और जनवरी के दौरान ये काशी में प्रवास करते हैं। फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत में जैसे ही तापमान बढ़ने लगता है, ये वापस अपने मूल स्थान की ओर उड़ान भरने लगते हैं।

इन पक्षियों की मौजूदगी से गंगा घाटों की रौनक कई गुना बढ़ जाती है। रंग-बिरंगे पंखों वाले ये पक्षी पर्यटकों और स्थानीय लोगों को आकर्षित करते हैं। खासकर नौका विहार करने वाले सैलानी इनके झुंड को देखने और कैमरे में कैद करने के लिए उत्साहित रहते हैं। कई लोग इन्हें दाना खिलाकर आनंद का अनुभव करते हैं।
अब गर्मी की आहट के साथ इनका झुंड धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। घाटों पर इनकी घटती संख्या प्रकृति प्रेमियों को थोड़ी मायूसी जरूर दे रही है। फिर भी उम्मीद है कि अगले शीतकाल में ये विदेशी मेहमान दोबारा लौटकर काशी की सर्दियों को फिर से जीवंत बना देंगे।

