4 वर्ष बाद भी नहीं हुई RDC बैठक! महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के विधि विभाग में पीएचडी प्रक्रिया ठप

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शोधार्थियों ने विधि विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष पर छात्रों के कैरियर के साथ खिलवाड़ करने का लगाया गंभीर आरोप 

वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के विधि विभाग में सत्र 2022-23 के पीएचडी कोर्स की प्रक्रिया में उल्लेखनीय विलंब देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस सत्र के शोधार्थियों के लिए अभी तक आरडीसी (Research Degree Committee) अथवा डीआरसी की बैठक तक आयोजित नहीं की गई है, जबकि सत्र शुरू हुए लगभग चार वर्ष बीत चुके हैं।

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यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के मानकों के अनुसार, पीएचडी शोधार्थी तीन वर्ष पूरे होने के बाद अपनी थीसिस जमा कर सकता है, लेकिन आरोप है कि विधि विभाग के इन शोधार्थियों के सुपरवाइजर निर्धारण और आगे की प्रक्रिया अभी तक अधर में है।

विभागीय लापरवाही के आरोप
शोधार्थियों के अनुसार, विधि विभाग में प्रवेश परीक्षा के परिणाम, वाइवा, कोर्सवर्क संचालन, कोर्सवर्क परीक्षा और उसके परिणाम घोषित करने में बार-बार अनावश्यक विलंब हुआ। शोधार्थियों को विभागाध्यक्ष, संकायाध्यक्ष तथा परीक्षा नियंत्रक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते रहे, जबकि समयबद्ध कार्रवाई नहीं हो सकी।

शोधार्थियों का यह भी कहना है कि विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष तीन टर्म से पद पर हैं तथा व्यक्तिगत मामलों में सक्रियता दिखाई जाती है, किंतु विद्यार्थी हित तथा शोध प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों में अपेक्षित रुचि नहीं ली जा रही है। परीक्षा नियंत्रक और विधि विभाग एक-दूसरे पर दोषारोपण करते नजर आते हैं।

विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय की छवि पर प्रभाव
इस लापरवाही के कारण शोधार्थियों का बहुमूल्य समय व्यर्थ हो रहा है और उनके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। साथ ही, प्रतिष्ठित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की शैक्षणिक छवि भी प्रभावित हो रही है।
विद्यापीठ प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि कुलपति महोदय के संज्ञान में इस मामले को लाकर शीघ्र ही आरडीसी बैठक आयोजित की जाए, जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

शोधार्थियों का मानना है कि यदि कुलपति को इस पूरे मामले की पूरी जानकारी होती, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। कुलपति सदैव विश्वविद्यालय के हित, शैक्षणिक उत्कृष्टता और विद्यार्थी कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। इस मामले में भी उनकी संज्ञान में लाए जाने पर उचित कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।

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