बिजली निजीकरण के विरोध में सड़कों पर उतरे कर्मचारी, भिखारीपुर में ऊर्जा प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

WhatsApp Channel Join Now

वाराणसी। भिखारीपुर स्थित प्रबंध निदेशक कार्यालय पर सोमवार को बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश की विद्युत वितरण व्यवस्था के निजीकरण और ऊर्जा प्रबंधन की कथित दमनात्मक नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में पूर्वांचल के बड़ी संख्या में बिजलीकर्मी, अभियंता, जूनियर इंजीनियर, तकनीकी कर्मचारी और संविदा कर्मी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और ऊर्जा प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कर्मचारी विरोधी नीतियों को वापस लेने की मांग उठाई।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि ऊर्जा प्रबंधन लगातार कर्मचारी हितों की आवाज उठाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को डराने के लिए निलंबन, दूरस्थ स्थानों पर स्थानांतरण, वेतन रोकने, चार्जशीट देने और मानसिक दबाव बनाने जैसी कार्रवाइयां की जा रही हैं, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

123

बिजलीकर्मियों ने कहा कि प्रदेश सरकार और ऊर्जा प्रबंधन बिजली सेवाओं के निजीकरण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। उनका आरोप है कि निजीकरण से न केवल कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित होंगे बल्कि आम उपभोक्ताओं पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। वक्ताओं ने कहा कि 3 दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री और शासन स्तर पर कर्मचारियों के साथ हुए लिखित समझौते का अब तक पालन नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है।

संघर्ष समिति ने मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान बिजलीकर्मियों पर दर्ज एफआईआर, निलंबन, अनुशासनात्मक कार्रवाई और स्थानांतरण को तत्काल वापस लेने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के बावजूद उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां बंद नहीं हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारी संगठनों की लोकतांत्रिक गतिविधियों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

123

सभा में मई 2025 में संशोधित सेवा नियमों का भी विरोध किया गया। संघर्ष समिति ने इसे तानाशाहीपूर्ण बताते हुए कहा कि बिना जांच और बिना सुनवाई के सेवा से बर्खास्त करने का प्रावधान पूरी तरह कर्मचारी विरोधी है। इसके साथ ही फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में भाग लेने पर बड़े पैमाने पर तबादले, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा बिजलीकर्मियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाने जैसी व्यवस्थाओं को तत्काल बंद करने की मांग की गई।

1232

बिजलीकर्मियों ने कहा कि वे कठिन परिस्थितियों में भी प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के लिए दिन-रात कार्य करते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। सभा को ई. जितेंद्र सिंह गुर्जर, ई. मायाशंकर तिवारी, महेंद्र राय, ओपी सिंह, प्रेमनाथ राय, चंद्रभूषण उपाध्याय, सूर्यदेव पांडेय सहित कई कर्मचारी नेताओं ने संबोधित किया।

Share this story