अस्सी घाट को जाममुक्त बनाने की कवायद तेज, प्रशासन ने लागू किया ‘नो व्हीकल जोन’

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वाराणसी। धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले अस्सीघाट क्षेत्र में लगातार बढ़ती भीड़ और जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए पुलिस प्रशासन ने नई यातायात व्यवस्था लागू की है। एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार के नेतृत्व में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत अस्सीघाट मोड़ से नगवां मार्ग स्थित होटल गंगा व्यू तक के इलाके को “नो व्हीकल जोन” घोषित कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य घाट क्षेत्र में यातायात दबाव कम करना और श्रद्धालुओं व पर्यटकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है।

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नई व्यवस्था के तहत घाट की ओर जाने वाले मार्ग पर दोनों तरफ बैरिकेडिंग कर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। पुलिस कर्मियों की तैनाती कर वाहनों को पहले ही रोकने की व्यवस्था की गई है, ताकि घाट क्षेत्र में केवल पैदल आवाजाही को प्राथमिकता दी जा सके। अधिकारियों का मानना है कि इससे अस्सीघाट के आसपास लगने वाले लंबे जाम से काफी हद तक राहत मिलेगी।

अस्सीघाट वाराणसी के सबसे व्यस्त और आकर्षण के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। यहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में स्थानीय लोग, श्रद्धालु और देश-विदेश से आने वाले पर्यटक पहुंचते हैं। सुबह-ए-बनारस कार्यक्रम, गंगा आरती, नौका विहार और विभिन्न धार्मिक आयोजनों के कारण दिनभर यहां भीड़ बनी रहती है। ऐसे में संकरी सड़कों पर दोपहिया और चारपहिया वाहनों के बढ़ते दबाव से अक्सर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो जाता था। जाम के कारण न केवल स्थानीय लोगों को परेशानी उठानी पड़ती थी, बल्कि पर्यटकों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता था।

एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने बताया कि क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि घाट क्षेत्र को सुगम और सुरक्षित बनाए रखने के लिए नियमों का पालन जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की इस पहल को स्थानीय व्यापारियों और क्षेत्रीय नागरिकों का भी समर्थन मिला है। लोगों का कहना है कि यदि इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो अस्सीघाट क्षेत्र में जाम की पुरानी समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। साथ ही पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी अधिक व्यवस्थित और शांत वातावरण मिल सकेगा, जिससे काशी की पर्यटन छवि को और मजबूती मिलेगी।

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