भारतीय आर्थिक परिषद की कार्यकारिणी में डॉ. अन्नपूर्णा दीक्षित का चयन, वाराणसी और यूपी को मिला सम्मान
वाराणसी। भारतीय आर्थिक परिषद (इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन – IEA) के 108वें वार्षिक अधिवेशन में डॉ. अन्नपूर्णा दीक्षित, विभागाध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, आर्य महिला पी.जी. कॉलेज, वाराणसी का उत्तर प्रदेश से कार्यकारिणी परिषद के सदस्य के रूप में एकमत से चयन किया गया। यह चयन न केवल डॉ. दीक्षित की शैक्षणिक उपलब्धियों और शोध कार्यों का सम्मान है, बल्कि उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से वाराणसी के लिए भी गर्व का विषय माना जा रहा है।
यह महत्वपूर्ण अधिवेशन 27 से 29 दिसंबर 2025 तक चेन्नई स्थित वीईएलएस इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड एडवांस्ड स्टडीज़ (VISTAS) में आयोजित किया गया। परिषद की जनरल बॉडी मीटिंग के दौरान भारतीय आर्थिक परिषद के चीफ कनवेनर डॉ. अनिल कुमार ठाकुर ने कार्यकारिणी परिषद के सदस्यों के चयन की औपचारिक घोषणा की। डॉ. अन्नपूर्णा दीक्षित का चयन सर्वसम्मति से किया गया, जो उनके अकादमिक नेतृत्व और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में योगदान को दर्शाता है।
तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय स्तर के अधिवेशन में देशभर से 1500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। सम्मेलन में जाने-माने अर्थशास्त्रियों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और शोधार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। इस दौरान देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति, नीतिगत सुधार, वैश्विक चुनौतियों, निवेश, रोजगार और समावेशी विकास जैसे विषयों पर गहन मंथन हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तमिलनाडु सरकार के श्रम कल्याण एवं कौशल विकास मंत्री थिरु सी. वी. गणेशन ने अपने संबोधन में कहा कि निवेश और निर्यात आने वाले समय में भारत की आर्थिक प्रगति के प्रमुख इंजन सिद्ध होंगे। अधिवेशन का उद्घाटन प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रो. एस. महेन्द्र देव ने किया, जबकि समापन सत्र में तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि ने प्रतिभागियों को संबोधित किया।
अधिवेशन में भूतपूर्व आरबीआई गवर्नर डॉ. सी. रंगराजन, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी (अमेरिका) के प्रो. कौशिक बसु तथा भारतीय आर्थिक परिषद के अध्यक्ष प्रो. ए. डी. एन. बाजपेयी जैसे प्रख्यात अर्थशास्त्रियों की सहभागिता रही। उल्लेखनीय है कि 13,000 से अधिक सदस्यों वाली भारतीय आर्थिक परिषद देश की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित अकादमिक संस्थाओं में शामिल है। डॉ. अन्नपूर्णा दीक्षित का कार्यकारिणी परिषद में चयन शैक्षणिक जगत के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

