नगर निगम का दावा : काशी के दर्जनों जलभराव प्वाइंट खत्म, बारिश में तेजी से निकल रहा पानी
वाराणसी। भारी बारिश के बावजूद इस वर्ष शहर में जलभराव की पुरानी तस्वीर काफी बदली नजर आ रही है। तेलियाबाग, अंधरापुल अंडरपास, भदउ चुंगी, मलदहिया चौराहा, जीजीआईसी स्कूल के सामने, लहुराबीर, गोदौलिया, सिगरा, महमूरगंज, गुरुबाग और रथयात्रा समेत कई संवेदनशील प्वाइंट पर पहले बारिश के बाद घंटों पानी जमा रहता था। नगर निगम का दावा है कि इस बार इन स्थानों पर जलनिकासी में काफी सुधार हुआ है और बारिश थमने के बाद पानी तेजी से निकल रहा है।
जलभराव से राहत के पीछे नगर निगम की फरवरी से शुरू की गई तैयारी को प्रमुख वजह बताया जा रहा है। महापौर अशोक कुमार तिवारी के नेतृत्व में निगम प्रशासन ने शहर के छोटे-बड़े नालों, सीवर लाइनों और गलीपिट की तली झाड़ सफाई का अभियान शुरू किया था। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल और वरिष्ठ अधिकारियों ने निचले इलाकों का निरीक्षण कर जलनिकासी की स्थिति की निगरानी की। ढलान या तकनीकी खामी के कारण जहां पानी रुकने की आशंका रही, वहां पंप लगाकर निकासी कराई गई।
फ्लोटिंग मैटेरियल बना चुनौती
बारिश के दौरान बहकर आने वाला कचरा और प्लास्टिक सीवर व नालों के मुहाने को जाम करने की बड़ी चुनौती बना हुआ है। इससे निपटने के लिए विशेष सफाई टीमों को लगाया गया है। टीमें लगातार गश्त कर गलीपिट और नालों की जालियों से कचरा हटाकर पानी का प्रवाह बनाए रखने में जुटी हैं।
22 वार्डों में सीवर सिस्टम होगा मजबूत
भविष्य में जलनिकासी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शहर के 200 से अधिक पुराने सीवरेज सिस्टम को दुरुस्त किया जा रहा है। वहीं 22 पुराने वार्डों में करीब दो हजार करोड़ रुपये की लागत से दशकों पुरानी सीवर और पेयजल पाइपलाइन बदलने का कार्य भी कराया जा रहा है। इससे पुराने शहर की ड्रेनेज क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। नगर निगम इस साल बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों और बारिश के पैटर्न का तकनीकी अध्ययन भी करा रहा है। विशेषज्ञों की सलाह से स्थायी ड्रेनेज प्लान तैयार किया जा रहा है।
186 वर्ग किमी हुआ नगर निगम का दायरा
84 नए गांवों के साथ रामनगर और सूजाबाद के शामिल होने से नगर निगम का क्षेत्रफल 84 से बढ़कर 186 वर्ग किलोमीटर हो गया है। इसके अलावा रोजाना तीन से चार लाख श्रद्धालुओं और पर्यटकों की फ्लोटिंग आबादी से भी नागरिक सुविधाओं पर दबाव रहता है। विस्तारित क्षेत्रों में सीवर और नालों के नेटवर्क को मजबूत करने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।

