वाराणसी में ‘गुड़िया-खिलौना’ कार्यशाला, आधुनिक पैकेजिंग से कारीगरों को मिलेगा नया संबल

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वाराणसी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के तहत भारतीय पैकेजिंग संस्थान के सहयोग से गुरुवार को वाराणसी में ‘गुड़िया और खिलौना’ विषय पर एक विशेष कार्यशाला एवं पैकेजिंग वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्पियों और छोटे उद्यमियों को आधुनिक पैकेजिंग तकनीकों की जानकारी देना और उनके उत्पादों की बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाना रहा।

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कार्यशाला में विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों ने भाग लिया। इस दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बताया कि किसी भी उत्पाद की बिक्री में उसकी पैकेजिंग की अहम भूमिका होती है। यदि पैकेजिंग आकर्षक, मजबूत और उपभोक्ता के अनुकूल हो, तो उत्पाद की मांग और बिक्री दोनों में वृद्धि होती है। विशेष रूप से खिलौना उद्योग के संदर्भ में पैकेजिंग को एक महत्वपूर्ण कारक बताया गया।

कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि केंद्र और राज्य सरकारें खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही हैं। ऐसे में इस तरह की कार्यशालाएं उद्यमियों को न केवल नई तकनीकों से परिचित कराती हैं, बल्कि उन्हें अपने उत्पादों को बेहतर ढंग से बाजार में प्रस्तुत करने के लिए भी प्रेरित करती हैं।

प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सरकार द्वारा आयोजित इन कार्यक्रमों से उन्हें काफी लाभ मिल रहा है। उन्हें नई-नई जानकारियां मिल रही हैं, जिससे वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाने में सक्षम हो रहे हैं।

इस अवसर पर एमएसएमई विकास कार्यालय वाराणसी के सहायक निदेशक राजेश कुमार चौधरी और एमएसएमई विकास कार्यालय प्रयागराज के निदेशक एल.बी.एस. यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं, भारतीय पैकेजिंग संस्थान के विशेषज्ञों ने तकनीकी सत्र के माध्यम से विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को पैकेजिंग से संबंधित सामग्री का वितरण भी किया गया। आयोजकों ने उम्मीद जताई कि इस पहल से वाराणसी के स्थानीय हस्तशिल्प और खिलौना उद्योग को नया प्रोत्साहन मिलेगा और उनके उत्पाद राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकेंगे।

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