परिणाम घोषित कराने की मांग को लेकर बीएचयू के दिव्यांग छात्र का धरना, प्रशासन पर उदासीनता का आरोप

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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दिव्यांग छात्र द्वारा अपना लंबित परीक्षा परिणाम घोषित कराने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर केंद्रीय कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना देने का मामला सामने आया है। छात्र का आरोप है कि विश्वविद्यालय के पोर्टल पर उसके अंक अपलोड नहीं किए गए, जिसके कारण उसका परीक्षा परिणाम लंबे समय से लंबित पड़ा है। कई महीनों तक विभाग और परीक्षा नियंत्रक कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद भी समाधान न मिलने पर उसने धरना शुरू किया।

धरने पर बैठे छात्र अभिनव सिंह सत्र 2021-22 के बी.ए. (भूगोल ऑनर्स) के विद्यार्थी रहे हैं। दोनों पैरों से दिव्यांग अभिनव का कहना है कि वह लंबे समय से अपनी शैक्षणिक समस्या के समाधान के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिल सका है। उनका आरोप है कि जब वह अपने विभाग में शिकायत लेकर जाते हैं तो उन्हें परीक्षा नियंत्रक कार्यालय भेज दिया जाता है, जबकि परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में उन्हें फिर विभाग से संपर्क करने की सलाह दी जाती है। इस प्रक्रिया के कारण उन्हें मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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छात्र का कहना है कि परिणाम लंबित रहने से उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो रहा है और उच्च शिक्षा से जुड़े अवसर भी बाधित हो रहे हैं। उन्होंने 9 जून 2026 को कुलपति को संबोधित एक लिखित शिकायत भी सौंपी है, जिसमें विभाग की एक शिक्षिका और विभागाध्यक्ष के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

शिकायत के अनुसार, छात्र का दावा है कि उन्हें सेशनल मूल्यांकन में अपेक्षा से अत्यंत कम अंक दिए गए, जबकि उन्होंने असाइनमेंट और अन्य शैक्षणिक कार्य निर्धारित समय पर पूरे किए थे। उनका आरोप है कि इसी कारण वह एक विषय में अनुत्तीर्ण घोषित होते रहे और उनका परिणाम प्रभावित हुआ। छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई तथा उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिला।

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अभिनव सिंह का कहना है कि उनके पास अपनी शिकायतों के समर्थन में कुछ दस्तावेज और अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिन्हें वह किसी भी निष्पक्ष जांच के दौरान प्रस्तुत करने को तैयार हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की पारदर्शी जांच कर जल्द परिणाम घोषित करने और यदि कोई त्रुटि हुई हो तो उसे सुधारने की मांग की है।

फिलहाल इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। छात्र को उम्मीद है कि उनके धरने के बाद प्रशासन उनकी समस्या पर गंभीरता से विचार करेगा और उचित समाधान निकाला जाएगा।

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