BHU में ‘विविधा’ कला प्रदर्शनी, युवा कलाकारों की रचनात्मकता ने किया प्रभावित

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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय में आयोजित ‘विविधा’ कला प्रदर्शनी इन दिनों कला प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। चित्रकला विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष प्रदर्शनी में देश के विभिन्न राज्यों और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आए 25 से अधिक युवा कलाकारों की रचनात्मक अभिव्यक्तियों का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। यह आयोजन विश्वविद्यालय की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को एक बार फिर सजीव रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

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प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रख्यात कलाकार अनस सुल्तान एवं चित्रकला विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. जसमिंदर कौर द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर प्रदर्शनी संयोजक डॉ. सुरेश चन्द्र जाँगिड़ ने बताया कि ‘विविधा’ केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि विविधता में एकता और रचनात्मक प्रयोगों का जीवंत मंच है। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी में विभिन्न माध्यमों, शैलियों और विषयों के माध्यम से एक समग्र कलात्मक वातावरण तैयार किया गया है, जो दर्शकों को कला की गहराइयों से जोड़ता है।

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प्रदर्शनी में शामिल कलाकारों ने अपनी-अपनी विशिष्ट शैली से कला को नए आयाम दिए हैं। आदित्य सेन, प्रिंस राज, नंदलाल कुमार, आंचल प्रजापति, प्रियांशी शर्मा और सूरज ने जल रंगों के माध्यम से प्रकृति और कल्पनाशीलता को जीवंत रूप में उकेरा है। वहीं जयंत साहा, अभिलाषा शर्मा और बसंत राजवार ने पोर्ट्रेट के जरिए मानवीय भावनाओं को गहराई से अभिव्यक्त किया है।

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वृंदा सिसोदिया और जस्मिता महादी ने रोजमर्रा की जिंदगी के सामान्य दृश्यों को कलात्मक रूप देकर उन्हें विशेष बना दिया। दूसरी ओर, अक्षत कुमार, जागृति गौतम और तारिका चौरे ने प्रिंट मेकिंग तकनीक के जरिए कला में नए प्रयोग प्रस्तुत किए, जो दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। भारतीय पारंपरिक कला को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करने का प्रयास भी इस प्रदर्शनी की खासियत है। हर्ष मौर्य, भूमि दीवान, निवेदिता सिंह, आकर्षिता गुप्ता, एस. आत्मजा, रिया कुमारी, सीमा कुमारी और साक्षी गुप्ता ने लघु चित्र शैली को समकालीन विषयों के साथ जोड़कर एक नई दृष्टि प्रस्तुत की है। इसके अलावा हिमांशु यादव की कैनवास पेंटिंग्स और अपूर्वा देबनाथ व ऐश्वर्या हलदार की स्याही आधारित प्रयोगात्मक कला भी दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित कर रही है।

प्रदर्शनी न केवल युवा कलाकारों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच है, बल्कि कला प्रेमियों के लिए भी यह एक सीखने और समझने का अवसर है। यहां दर्शकों को एक ही स्थान पर परंपरा और आधुनिकता का सुंदर समन्वय देखने को मिल रहा है, जो इस आयोजन को और भी खास बनाता है। उद्घाटन समारोह में प्रो. मनीष अरोड़ा, प्रो. शांति स्वरूप सिन्हा, डॉ. महेश सिंह, सुरेश नायर, डॉ. राजीव मंडल और डॉ. सुनील पटेल सहित अनेक गणमान्य लोग, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

यह प्रदर्शनी 16 अप्रैल तक आम दर्शकों के लिए खुली रहेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शहर के सभी कला प्रेमियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों से इस प्रदर्शनी का अवलोकन करने की अपील की है, ताकि वे उभरते कलाकारों की प्रतिभा और उनकी रचनात्मक सोच को करीब से समझ सकें।

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