डीआईजी वैभव कृष्ण ने सुनी जेन जी की बात, बोले- सपने बड़े रखें, चरित्र उससे भी बड़ा
वाराणसी। अधिकारों और भविष्य से जुड़े सवालों के बीच जेन जी को उनकी जिम्मेदारियों और सामाजिक भूमिका का अहसास कराने के लिए लमही स्थित सुभाष भवन में जेन जी कार्यशाला आयोजित की गई। विशाल भारत संस्थान एवं मालवीय सेंटर फॉर पीस रिसर्च, बीएचयू के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला का विषय ‘जेन जी : राष्ट्र, समाज, परिवार के प्रति कर्तव्य निर्वहन एवं कैरियर निर्माण’ रहा। कार्यक्रम में युवाओं ने अपनी समस्याएं और चुनौतियां भी प्रमुखता से रखीं।
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईजी वैभव कृष्ण, मालवीय सेंटर फॉर पीस रिसर्च बीएचयू के कोऑर्डिनेटर प्रो. मनोज मिश्रा और विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने सुभाष मंदिर में माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर किया। जेन जी कम्युनिटी की चेयरपर्सन प्रज्ञा पारमिता, युवा परिषद बीएचयू की चेयरपर्सन जीनत रहमान और जिला प्रमुख सत्यम राय ने युवाओं से जुड़े सवाल डीआईजी के सामने रखे। डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि भारत के करीब 38 करोड़ जेन जी युवाओं की ऊर्जा देश और दुनिया के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके लिए संस्कृति, संस्कार और कैरियर को साथ लेकर चलना जरूरी है।

डीआईजी वैभव कृष्ण ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से युवाओं को जीवन, कैरियर और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि परिवार को केवल पैसा नहीं, बल्कि समय भी चाहिए। माता-पिता के साथ ऐसा व्यवहार न करें कि वे अपने ही बच्चों से बात करने में संकोच करें। उन्होंने कहा कि जीवन इंस्टाग्राम रील नहीं है और हर सफलता के पीछे असफलताओं का इतिहास होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता को जीवन का अंत नहीं मानना चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया और एआई का उपयोग साधन के रूप में करने की सलाह दी। कहा कि मोबाइल को टूल बनाएं, उसका गुलाम न बनें। तनाव की स्थिति में विश्वसनीय व्यक्ति से सलाह लें और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चुप रहने के बजाय जरूरत पड़ने पर बात करें। उन्होंने युवाओं को माता-पिता का सम्मान, स्वास्थ्य का ध्यान, गलत संगति से दूरी, कानून और संविधान का सम्मान, समाज के लिए समय देने तथा ईमानदारी से समझौता न करने की सलाह दी।

प्रो. मनोज मिश्रा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में युवाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के युवाओं को जागरूक रहना होगा। उन्होंने कहा कि जेन जी संस्कृति और संस्कार से जुड़े रहते हुए किसी भी प्रकार के दुरुपयोग से सावधान रहें। कार्यशाला में सृष्टि त्यागी, रोकसार परवीन, मिलन महतो, अर्शिता भारती, प्रज्ञा परमिता महारी और जीनत रहमान ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। समूह चर्चा के बाद 15 जेन जी युवाओं का सोशल लीडरशिप के लिए चयन किया गया। अध्यक्षता साहित्यकार डॉ. कवीन्द्र नारायण ने की। मणिपुर की सामाजिक कार्यकर्ता चिंकी पाव ने पूर्वोत्तर के युवाओं को देश की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया। कार्यक्रम में 198 जेन जी युवाओं ने भाग लिया।

