खाना देर से मिलने पर बिगड़ा धनराज का मिजाज, बेड़ियां तोड़ तालाब में उतरा गजराज
करीब चार घंटे तक पंपासर पोखरे में रहा हाथी, महावतों ने डालियां दिखाकर मनाने की कोशिश की, बाहर आने के बाद खिलाया खाना
वाराणसी। रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला की तैयारियों के बीच सोमवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब हाथी धनराज बेड़ियां तोड़कर पंपासर पोखरे में जा उतरा। बताया गया कि खाना मिलने में देरी से हाथी का मूड बिगड़ गया और वह खुले बगीचे से निकलकर तालाब में जा पहुंचा। हाथी के अचानक तालाब में उतरने की सूचना मिलते ही रामलीला आयोजन से जुड़े लोगों में चिंता फैल गई।
धनराज समेत चार हाथी इन दिनों रामनगर के पंचवटी मैदान स्थित खुले बगीचे में महावतों के साथ रह रहे हैं। ये हाथी रामनगर की रामलीला के विभिन्न आयोजनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। धनराज को आजमगढ़ के जीयनपुर से रामलीला के लिए लाया गया है। पिछले करीब छह वर्षों से काशी राजपरिवार के अनंत नारायण सिंह इसी हाथी पर बैठकर रामलीला का अवलोकन करते हैं।
बताया गया कि सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे खाना मिलने में देरी होने से धनराज बेचैन हो गया। देखते ही देखते उसने बंधी बेड़ियां तोड़ दीं और पंचवटी मैदान से निकलकर पंपासर पोखरे में जा उतरा। विशालकाय हाथी को तालाब में उतरते देख आसपास मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लोगों ने सुरक्षित दूरी बना ली और इसकी सूचना महावतों तथा रामलीला से जुड़े लोगों को दी।
मुख्य महावत इजराइल समेत अन्य महावत मौके पर पहुंचे और हाथी को तालाब से बाहर निकालने के प्रयास शुरू किए। महावतों ने उसे आवाज देकर और पेड़ की हरी डालियां दिखाकर बाहर आने के लिए मनाने की कोशिश की। हालांकि धनराज काफी देर तक तालाब से बाहर आने को तैयार नहीं हुआ। महावत लगातार उसके व्यवहार पर नजर बनाए रहे और किसी तरह की जल्दबाजी से बचते हुए उसे शांत करने का प्रयास करते रहे।
करीब चार घंटे तक मान-मनौव्वल के बाद शाम करीब चार बजे धनराज तालाब से बाहर आया। बाहर निकलते ही महावतों ने उसे खाना खिलाया। इसके बाद उसका मिजाज शांत हुआ और स्थिति सामान्य हो सकी। महावतों ने हाथी को संभालते हुए वापस रामलीला स्थल की ओर रवाना किया।

