गुरु पूर्णिमा पर काशी धर्मपीठ में उमड़ी भक्तों की भीड़, चातुर्मास महाव्रत के साथ गुरु दीक्षा महोत्सव का शुभारंभ

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वाराणसी। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर नगवा स्थित संत रविदास पार्क के समीप अनंत विभूषित काशी धर्मपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ मठ में चातुर्मास महाव्रत एवं गुरु पूर्णिमा महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। दो दिवसीय आयोजन के प्रथम दिन बुधवार को प्रातःकाल से ही मठ परिसर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से गुलजार रहा। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में भक्त मठ पहुंचे और अपने गुरु के श्रीचरणों में नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु मंत्र की दीक्षा लेकर अपने आध्यात्मिक जीवन को नई दिशा देने का संकल्प लिया।

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प्रातः 7 बजे से प्रारंभ हुए गुरु दीक्षा कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और भजन-कीर्तन से पूरा मठ परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। गुरु पूजन एवं चरण पादुका पूजन के साथ गुरु पूर्णिमा महोत्सव का विधिवत शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए चातुर्मास के चार महीनों तक धर्म, साधना, सेवा और आत्मचिंतन के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर मठ की ओर से कहा गया कि भारतीय सनातन परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु ही शिष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान, विवेक और आत्मबोध के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु के मार्गदर्शन से मनुष्य जीवन की कठिनाइयों का समाधान प्राप्त करता है तथा ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि गुरु के प्रति श्रद्धा, विश्वास, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है, जो गुरु-शिष्य परंपरा की अमूल्य विरासत को सुदृढ़ करता है।

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चातुर्मास महोत्सव के अंतर्गत संत-महात्माओं का विशेष सत्संग, वैदिक अनुष्ठान, धार्मिक प्रवचन एवं आध्यात्मिक विचार गोष्ठियों का आयोजन किया गया। दंडी संन्यासियों एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए साधु-संतों का सम्मान किया गया तथा उनके लिए भव्य भंडारे की व्यवस्था की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। पूरे दिन मठ परिसर में भजन-कीर्तन, हवन, पूजन और सत्संग का क्रम निरंतर चलता रहा, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत बना रहा।

श्रद्धालुओं ने गुरु के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की। आकर्षक विद्युत सज्जा, पुष्प सजावट और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। मठ परिसर में सेवा कार्यों में जुटे स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की, जिससे दूर-दराज से आए भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

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आयोजकों के अनुसार चातुर्मास महाव्रत के दौरान आगामी चार महीनों तक धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को समर्पित विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। देर रात तक चले विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ तथा गुरु-शिष्य परंपरा के सनातन संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बना।

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