दालमंडी सड़क चौड़ीकरण के लिए फिर शुरू हुआ ध्वस्तीकरण, दुकानदारों में आक्रोश, बोले, बिना सूचना दिए हो रही कार्रवाई
वाराणसी। दालमंडी गली के बहुप्रतीक्षित चौड़ीकरण को लेकर लोक निर्माण विभाग द्वारा 5 जनवरी तक दिया गया अल्टीमेटम समाप्त होते ही प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार को एडीएम सिटी आलोक कुमार, एसीपी सहित प्रशासनिक अधिकारियों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दालमंडी क्षेत्र में दूसरे चरण की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई। इसको लेकर दुकानदारों में आक्रोश देखने को मिला। दुकानदारों ने प्रशासन पर बिना सूचना कार्रवाई करने और ज्यादती का आरोप लगाया।

प्रशासन की कार्रवाई के मद्देनज़र पूरे दालमंडी इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तीन थानों की पुलिस के लगभग 150 जवान मौके पर तैनात किए गए हैं। इसके अलावा पीएसी और पैरामिलिट्री फोर्स के करीब 100 जवानों को रिजर्व में रखा गया है। किसी भी तरह के विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए दालमंडी गली में बैरिकेडिंग कर दी गई है और हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर स्थानीय दुकानदारों और मकान मालिकों में नाराजगी देखी जा रही है। हालांकि भारी पुलिस बल की मौजूदगी के चलते कोई खुला विरोध सामने नहीं आया। गौरतलब है कि इससे पहले नवंबर माह में चौड़ीकरण के पहले चरण के दौरान छह मकानों को ध्वस्त किया जा चुका है। अब दूसरे चरण में कुल तीन मकानों को गिराया जाना प्रस्तावित है, जिनमें से एक पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

प्रशासन के अनुसार दालमंडी क्षेत्र में कुल 186 मकानों को चौड़ीकरण परियोजना के तहत चिह्नित किया गया है। इनमें से अब तक केवल 20 मकानों की ही रजिस्ट्री हो पाई है। अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों ने अब तक अपनी रजिस्ट्री नहीं कराई है, उन्हें आगे चलकर कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। नवंबर के बाद कुछ समय के लिए रुकी यह कार्रवाई अब दोबारा शुरू कर दी गई है और परियोजना पूरी होने तक इसे लगातार जारी रखा जाएगा।

एडीएम सिटी आलोक वर्मा ने स्पष्ट किया कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई केवल उन्हीं मकानों पर की जा रही है, जिनका अधिग्रहण प्रशासन द्वारा पूरा किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक छह मकान गिराए जा चुके हैं और वर्तमान में तीन मकानों पर कार्रवाई चल रही है। वहीं दूसरी ओर दुकानदारों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ध्वस्तीकरण से पहले उन्हें न तो कोई लिखित नोटिस दिया गया और न ही दुकान खाली करने के लिए पर्याप्त समय। दुकानदारों का आरोप है कि उन्हें मात्र 10 मिनट में दुकान खाली करने के लिए कहा गया, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई नियमों की अनदेखी कर की जा रही है और प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है।





