बीएचयू में संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की मांग तेज, नई भर्तियों पर रोक के लिए उठाई आवाज

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वाराणसी। बीएचयू में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को स्थायी किए जाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। पिछले 16 दिनों से कर्मचारी मधुबन पार्क में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनरत कर्मचारी विश्वविद्यालय प्रशासन से अपने भविष्य को सुरक्षित करने की गुहार लगा रहे हैं।

मामले को लेकर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. सुबेदार सिंह ने कुलपति को पत्र लिखकर इस मुद्दे को और मजबूती दी है। उन्होंने मांग की है कि जब तक वर्तमान संविदा, दैनिक वेतनभोगी और मास्टर रोल पर कार्यरत कर्मचारियों का नियमितीकरण नहीं हो जाता, तब तक नई नियुक्तियों की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को प्राथमिकता देना न्यायसंगत और मानवीय दोनों दृष्टि से आवश्यक है।

डॉ. सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि विश्वविद्यालय में कई कर्मचारी 10 से 30 वर्षों से लगातार कार्यरत हैं और संस्थान के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें स्थायी नियुक्ति का लाभ नहीं मिल सका है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण पर विचार किया जाना चाहिए, जिससे उनके अधिकारों की रक्षा हो सके।

हाल ही में बीएचयू प्रशासन द्वारा जूनियर क्लर्क पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है, जिसे लेकर संविदा कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा है। कर्मचारियों और उनके समर्थकों का कहना है कि पहले से कार्यरत लोगों की अनदेखी कर नई भर्तियां शुरू करना उनके साथ अन्याय होगा। इससे कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना और गहरी हो सकती है।

धरना दे रहे कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से कम वेतन और अस्थिर नौकरी के बावजूद पूरी निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। अब वे चाहते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनके योगदान को स्वीकार करते हुए उन्हें स्थायी नियुक्ति का अवसर दे। वहीं, कर्मचारी संगठन लगातार प्रशासन से वार्ता कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।

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