एकादशी पर भक्तों में नहीं बंटेगा काढ़ा प्रसाद, परंपरा के अनुसार केवल भगवान जगन्नाथ को लगेगा भोग

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वाराणसी। असि स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में अनसर (अनवसर) काल के दौरान भगवान जगन्नाथ के अस्वस्थ होने की परंपरा का निर्वहन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को देवशयनी एकादशी के अवसर पर भगवान को औषधीय काढ़े का भोग तो लगाया जाएगा, लेकिन परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं में काढ़े के प्रसाद का वितरण नहीं किया जाएगा। मंदिर प्रशासन ने भक्तों से इस परंपरा का सम्मान करने की अपील की है।

मंदिर के पुजारी पंडित राधेश्याम पांडेय ने बताया कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को स्नान पूर्णिमा के बाद अस्वस्थ माना जाता है। इस अवधि में उन्हें औषधीय काढ़ा, फल और हल्का सात्विक आहार अर्पित किया जाता है, ताकि उनके स्वास्थ्य लाभ की परंपरा का पालन हो सके।

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उन्होंने बताया कि गुरुवार को भी भगवान को विधिवत काढ़े का भोग लगाया गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच काढ़े का प्रसाद वितरित किया गया। प्रसाद प्राप्त करने के लिए शहर के साथ-साथ आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

पंडित पांडेय ने बताया कि एकादशी के दिन मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार भगवान को काढ़े का भोग तो अर्पित किया जाएगा, लेकिन उस दिन श्रद्धालुओं में काढ़े का प्रसाद नहीं बांटा जाएगा। यह परंपरा मंदिर की स्थापना काल से चली आ रही है और वर्षों से इसका पालन किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शनिवार से पुनः श्रद्धालुओं को काढ़े का प्रसाद वितरित किया जाएगा। इसके लिए मंदिर में सभी आवश्यक तैयारियां की गई हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ के स्वास्थ्य लाभ के लिए तैयार किए जाने वाले इस औषधीय काढ़े में कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और मसालों का उपयोग किया जाता है। श्रद्धालु इसे भगवान का विशेष प्रसाद मानकर ग्रहण करते हैं और मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य लाभ एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।

मंदिर परिसर में इन दिनों प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। भगवान के स्वास्थ्य लाभ की कामना के साथ भक्त विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन ने बताया कि निर्धारित परंपराओं के अनुसार सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं और शनिवार से श्रद्धालुओं को पुनः काढ़े का प्रसाद उपलब्ध कराया जाएगा।

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