दशाश्वमेध, हरिश्चंद्र और अस्सी घाट बनेंगे दिव्यांग फ्रेंडली, श्रद्धालुओं को मिलेगी बेहतर सुविधा

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वाराणसी। काशी के प्रमुख गंगा घाटों को दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अधिक सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इस योजना के तहत पहले चरण में दशाश्वमेध, हरिश्चंद्र और अस्सी घाट को दिव्यांग फ्रेंडली बनाया जाएगा। परियोजना का कार्य यूपीपीसीएल (उत्तर प्रदेश  की देखरेख में कराया जा रहा है।

योजना के तहत घाटों पर ऐसे निर्माण और सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे दिव्यांगजन, बुजुर्ग और शारीरिक रूप से असुविधा वाले लोगों को गंगा घाटों तक पहुंचने और आवागमन में आसानी हो सके। इसके बाद अन्य प्रमुख घाटों पर भी इसी प्रकार की सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इस पहल का उद्देश्य सभी श्रद्धालुओं के लिए काशी की आध्यात्मिक यात्रा को अधिक सहज और सुलभ बनाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि घाटों पर दिव्यांग अनुकूल सुविधाएं विकसित होने से न केवल स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भी बिना किसी कठिनाई के धार्मिक स्थलों का दर्शन कर सकेंगे। इससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और समावेशी विकास की दिशा में वाराणसी एक नई पहचान स्थापित करेगा।

भगवान विश्वनाथ मंदिर के पूर्व संयोजक एवं राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य डॉ. उत्तर आशा ने बताया कि काशी आने वाले अधिकांश श्रद्धालु गंगा स्नान और प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन-पूजन के लिए घाटों तक पहुंचते हैं। हालांकि, अब तक अधिकांश घाट दिव्यांगजन के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं थे। सरकार ने इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए पहले चरण में दशाश्वमेध, हरिश्चंद्र और अस्सी घाट पर दिव्यांग फ्रेंडली सुविधाओं के निर्माण का निर्णय लिया है। इससे सभी वर्गों के श्रद्धालुओं को समान रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी।

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