नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर जागरुकता के लिए चार जगहों पर नुक्कड़ नाटक, उमड़ी दर्शकों की भीड़
वाराणसी। महिलाओं के अधिकार, समानता और राजनीतिक भागीदारी को लेकर समाज में जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से बीते BNA एवं संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ विषय पर एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। शहर के विभिन्न प्रमुख स्थलों पर प्रस्तुत किए गए इस नाटक को लोगों ने काफी सराहा और बड़ी संख्या में दर्शकों ने इसमें भागीदारी निभाई।

यह जागरूकता अभियान शहर के चार महत्वपूर्ण स्थानों डाफी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर, सुसुवाही और तुलसी घाट पर आयोजित किया गया। प्रत्येक स्थान पर स्थानीय नागरिकों, छात्रों और महिलाओं की अच्छी-खासी उपस्थिति देखने को मिली। दर्शकों ने नाटक के माध्यम से महिलाओं के अधिकारों और उनकी राजनीतिक भागीदारी से जुड़े महत्वपूर्ण संदेशों को ध्यानपूर्वक सुना और समझा।

कार्यक्रम का निर्देशन रंगकर्मी अमित कुमार श्रीवास्तव द्वारा किया गया, जिन्होंने सामाजिक मुद्दों को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया। नाटक का मंचन बनारस के युवा और अनुभवी कलाकारों की टीम ने किया, जिनमें प्रियांशु, आयुष, पियूष, रोहित, आनंदिता, आशिमा और कशिश की सक्रिय सहभागिता रही। कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय और संवादों के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण, समान अधिकार और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी की आवश्यकता को उजागर किया।

नाटक के दौरान यह संदेश प्रमुख रूप से दिया गया कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ महिलाओं को राजनीति और शासन व्यवस्था में समान अवसर प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और समाज में लैंगिक समानता को मजबूती मिलेगी।
आयोजकों ने बताया कि सामाजिक मुद्दों पर जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए सांस्कृतिक गतिविधियां एक प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन लगातार किया जाएगा, ताकि समाज के हर वर्ग तक जागरूकता का संदेश पहुंच सके और महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति सशक्त बनाया जा सके। स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे नुक्कड़ नाटक समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का सशक्त माध्यम बन सकते हैं और युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति प्रेरित करते हैं।

