आईएमएस-बीएचयू में 21.89 करोड़ की मशीन खरीद पर विवाद, शिकायत के बाद जांच की मांग

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वाराणसी। आईएमएस-बीएचयू में आउटसोर्सिंग भर्ती से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच अब चिकित्सा उपकरणों की खरीद प्रक्रिया भी विवादों में आ गई है। एयरबोर्न बायोलोड कंट्रोल डिवाइस की खरीद को लेकर की गई शिकायत ने विश्वविद्यालय प्रशासन और स्वास्थ्य क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है। शिकायतकर्ता ने खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और लागत निर्धारण को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

आईएमएस-बीएचयू में जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से छह एयरबोर्न बायोलोड कंट्रोल डिवाइस खरीदने के लिए लगभग 21.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस आधार पर प्रत्येक मशीन की कीमत करीब 3.64 करोड़ रुपये बैठती है, जो अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में खरीदी गई समान मशीनों की तुलना में काफी अधिक है।

शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2024 में श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) ने इसी तरह की मशीन लगभग 60 लाख रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी थी। वहीं वर्ष 2025 में नई दिल्ली स्थित एम्स ने भी इसी श्रेणी की मशीन करीब 66 लाख रुपये प्रति यूनिट में खरीदी थी। ऐसे में आईएमएस-बीएचयू में प्रस्तावित खरीद की लागत को लेकर सवाल उठाए गए हैं और इसकी तकनीकी व वित्तीय जांच की मांग की गई है।

मामले की शिकायत बीएचयू के कुलपति, कुलसचिव, कार्य परिषद (ईसी) के सदस्यों तथा मुख्य सतर्कता अधिकारी को भेजी गई है। शिकायतकर्ता ने खरीद प्रक्रिया की समीक्षा कर वास्तविक बाजार मूल्य, तकनीकी विनिर्देश और निविदा प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। आईएमएस-बीएचयू में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए व्यापक स्तर पर आधारभूत संरचना का विकास किया जा रहा है। संस्थान में नए भवनों का निर्माण, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद, ऑपरेशन थिएटरों का उन्नयन तथा चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति जैसे कार्य तेजी से चल रहे हैं। इसी क्रम में विभिन्न विभागों के लिए नई तकनीक आधारित उपकरण खरीदे जा रहे हैं।

हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की अभी तक किसी जांच एजेंसी या विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। आईएमएस निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने कहा कि संस्थान में सभी खरीद प्रक्रियाएं निर्धारित सरकारी नियमों और पारदर्शी व्यवस्था के तहत की जाती हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी उपकरण की खरीद संबंधित विभागीय समिति की संस्तुति के बाद ही की जाती है। साथ ही उन्होंने कहा कि संबंधित शिकायत की उन्हें विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन संस्थान में नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाता है।

अब इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन और सतर्कता विभाग की संभावित जांच पर सभी की निगाहें टिकी हैं। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने तथ्यात्मक हैं और खरीद प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार संपन्न हुई या नहीं।

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