आईएमएस-बीएचयू में मेडिकल छात्रों की उपस्थिति पर विवाद, एनएमसी से फर्जी हाजिरी मामले की जांच की मांग
वाराणसी। बीएचयू के आयुर्विज्ञान संस्थान (आईएमएस) में मेडिकल छात्रों की उपस्थिति को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। एमबीबीएस प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों की कथित फर्जी उपस्थिति दर्ज किए जाने के आरोप में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के अध्यक्ष और सचिव को शिकायत भेजी गई है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, 7 जुलाई को आयोजित एक प्रैक्टिकल कक्षा के दौरान एमबीबीएस प्रथम वर्ष के तीन छात्रों ने द्वितीय वर्ष के तीन ऐसे छात्रों की उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज कर दी, जो उस समय प्रैक्टिकल कक्षा में मौजूद नहीं थे। आरोप है कि जिन छात्रों की उपस्थिति दर्ज की गई, वे विभाग में उपस्थित नहीं थे, जबकि उपस्थिति दर्ज करने वाले प्रथम वर्ष के छात्र भी अपनी निर्धारित प्रैक्टिकल कक्षा में शामिल नहीं हुए थे।
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि पूरे घटनाक्रम के वीडियो साक्ष्य उपलब्ध हैं। उनका कहना है कि वीडियोग्राफी में संबंधित छात्रों की वास्तविक उपस्थिति और अनुपस्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। शिकायत में इन वीडियो को जांच का प्रमुख आधार बनाते हुए उपस्थिति रजिस्टर, विभागीय रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज का भी परीक्षण कराने की मांग की गई है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि हाल ही में आयोजित एक शैक्षणिक कैंप में कुछ छात्रों को भेजने के उद्देश्य से उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की व्यवस्था की गई। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल कुछ छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी उपस्थिति प्रणाली और उसके संचालन पर भी सवाल खड़े होंगे।
शिकायतकर्ता का कहना है कि नेशनल मेडिकल कमीशन ने मेडिकल शिक्षा में उपस्थिति और प्रायोगिक प्रशिक्षण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं। ऐसे में किसी अनुपस्थित छात्र की ओर से दूसरे छात्र द्वारा उपस्थिति दर्ज करना शैक्षणिक अनुशासन, पारदर्शिता और मेडिकल शिक्षा की विश्वसनीयता के विपरीत है। एनएमसी से पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच करने तथा आरोप सिद्ध होने की स्थिति में संबंधित छात्रों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
फिलहाल इस मामले में आईएमएस-बीएचयू प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, एनएमसी ने भी शिकायत पर अब तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। ऐसे में जांच पूरी होने तक शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह मामला मेडिकल शिक्षा में अनुशासन और उपस्थिति व्यवस्था को लेकर गंभीर माना जाएगा।

